देश की प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों को सम्मानित करने का दिन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस आज मनाया जाएगा। यह दिन नवाचार, स्वदेशी प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक विकास में भारत की प्रगति को दर्शाता है। यह दिन पोखरण की गूंज से जन्मा है। इस दिन की नींव 1998 में पड़ी, जब भारत ने दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई। भारत ने राजस्थान के पोखरण में 3 परमाणु बमों का सफल परीक्षण किया। इसके 2 दिन बाद 13 मई को 2 और परीक्षण हुए। कुल 5 परमाणु धमाके किए गए। तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में और स्व. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम व डॉ. आर. चिदंबरम के वैज्ञानिक निर्देशन में यह मिशन पूरा हुआ था। इस सफलता के बाद ही वर्ष,1999 में अटल सरकार ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया। तब से हर साल टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड, विज्ञान मंत्रालय के तहत इसे मनाया जाता है। पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट हंस-3 ने बेंगलुरु में पहली उड़ान भरी। पोखरण के बाद भारत दुनिया का छठा परमाणु शक्ति संपन्न देश बना। यह दिवस आत्मनिर्भर भारत की भावना और स्वदेशी तकनीक पर जोर देता है। वर्ष, २०२६ में भी जिम्मेदार नवाचार और समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है, जो इस बात को दिखाता है कि एआई, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल उपकरणों जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियां समाज के सभी वर्गों को कैसे लाभ पहुंचा सकती हैं?




