नई दिल्ली : भारत और नॉर्वे समुद्री, हरित ऊर्जा और नवाचार क्षेत्र में नए अवसरों की तलाश कर रहे हैं। नॉर्वे की भारत में राजदूत मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी Oslo दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत में कार्यरत नॉर्वे की कंपनियों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 160 नॉर्वे की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं और ऊर्जा, समुद्री तथा पुनर्चक्रण अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में नए व्यापारिक अवसर तलाश रही हैं।
राजदूत ने कहा कि भारत में मौजूद नॉर्वे की लगभग 70 प्रतिशत कंपनियां समुद्री क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। नॉर्वे दुनिया के प्रमुख समुद्री देशों में शामिल है और भारत भी इस क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार जहाज निर्माण क्षेत्र को विस्तार देने के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। पिछले एक दशक में भारत के समुद्री क्षेत्र में क्षमता, संपर्क और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केंद्र सरकार की Sagarmala योजना के तहत बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग ढांचे के विकास तथा माल ढुलाई क्षमता को मजबूत किया गया है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के जहाज निर्माण और समुद्री ढांचे को मजबूत बनाने के लिए ₹.69,725 करोड़ की मंजूरी दी है। मे-एलिन स्टेनर ने कहा कि वर्तमान में नॉर्वे द्वारा ऑर्डर किए गए लगभग 10 प्रतिशत जहाज भारत में बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सबसे अधिक संभावनाओं वाले क्षेत्र की बात करें तो वह निश्चित रूप से समुद्री क्षेत्र ही है।
हरित ऊर्जा क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि नॉर्वे पहले से ही भारत को सहयोग दे रहा है और आने वाले समय में इसे और मजबूत करना चाहता है। नॉर्वे लंबे समय से तेल और गैस संसाधनों वाला देश रहा है, लेकिन अब वह हरित भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस बदलाव के लिए कई आधुनिक तकनीकी समाधान विकसित किए गए हैं और नॉर्वे की कंपनियां इन्हें भारत के साथ साझा करना चाहती हैं। भारत के नवाचार तंत्र की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश में तेजी से नए विचार और तकनीक विकसित हो रही हैं। नॉर्वे के नवाचार उद्यम भी भारत में उपलब्ध अवसरों पर नजर बनाए हुए हैं। दोनों देश शोध सहयोग और नए व्यापारिक समझौतों के जरिए इस व्यवस्था को और मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 May से 19 May तक नॉर्वे दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह तीसरे India-Nordic Summit और कई द्विपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला नॉर्वे दौरा होगा। साथ ही पिछले 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की यह पहली यात्रा होगी। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ India-Norway Business And Research Summit को भी संबोधित करेंगे।




