भारत के Retail क्षेत्र में वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान मजबूत मांग देखने को मिली। जनवरी-मार्च अवधि में देश के शीर्ष सात शहरों में कुल 3.1 मिलियन वर्गफुट Retail Leasing दर्ज की गई। मंगलवार को जारी जेएलएल की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई। हालांकि तिमाही आधार पर Leasing में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 1 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में Leasing की रफ्तार अभी भी मजबूत बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, Retail Leasing में तिमाही गिरावट की मुख्य वजह बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले नए मॉल की सीमित आपूर्ति रही। वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में लगभग 2.5मिलियन वर्गफुट नए मॉल स्पेस की आपूर्ति हुई थी, जिसके बाद इस तिमाही में नई परियोजनाओं की संख्या कम रही। विदेशी ब्रांड्स ने भारत के उपभोक्ता बाजार पर मजबूत भरोसा जताया है। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की Leasing गतिविधियों में सालाना आधार पर 48प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसका प्रमुख कारण भारत के मध्यम वर्ग की बढ़ती खरीद क्षमता और घरेलू खपत में मजबूती को माना जा रहा है।
जेएलएल इंडिया के राहुल अरोड़ा ने कहा कि बेंगलुरु और चेन्नई में Retail कंपनियां प्रमुख हाई स्ट्रीट क्षेत्रों की ओर बढ़ रही हैं, जबकि दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद में मॉल आधारित गतिविधियां लगातार मजबूत बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सफल विस्तार के लिए कंपनियों को मल्टी-फॉर्मेट रणनीति अपनानी होगी, जिसमें मॉल और सड़क किनारे दोनों प्रकार के स्थानों का संतुलन जरूरी है। रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2030 तक लगभग 46.1 मिलियन वर्गफुट संस्थागत गुणवत्ता वाले Retail स्पेस की संभावित आपूर्ति बाजार में आने वाली है। लगातार बढ़ती मांग के चलते भारत में Retail Real Estate क्षेत्र नए विस्तार चक्र की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 भारतीय Retail क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ। इस दौरान Leasing गतिविधियां पिछले तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। बढ़ती मांग के साथ लगभग 6मिलियन वर्गफुट नए Retail स्पेस की आपूर्ति भी बाजार में हुई।
पूरे वर्ष 2025 में कुल 12.5 मिलियन वर्गफुट Leasing दर्ज की गई, जो सालाना आधार पर 54 प्रतिशत की वृद्धि रही। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2026 में भी इसी प्रकार मजबूत मांग बनी रह सकती है। डी2सी ब्रांड्स, वैल्यू फैशन कंपनियां, ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियां और खाद्य एवं पेय कारोबार से जुड़ी कंपनियों ने पिछले वर्ष Retail स्पेस की मांग को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। कोलकाता जैसे द्वितीयक बाजारों का योगदान भी उल्लेखनीय रहा। नए शुरू हुए परिसंपत्तियों में बेहतर मांग के चलते कोलकाता ने कुल बाजार में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की।

