Middle East में बढ़ते तनाव के बीच भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर बड़ा आर्थिक दबाव बन गया है। पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो FY26 में सरकारी तेल कंपनियों का पूरा मुनाफा खत्म हो सकता है। मुंबई में आयोजित Confederation of Indian Industry के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में मंत्री ने कहा कि Middle East संघर्ष के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट ने भारतीय ईंधन विक्रेताओं की स्थिति को गंभीर बना दिया है। उन्होंने बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों को इस समय प्रतिदिन लगभग ₹.1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने अनुमान जताया कि यदि मौजूदा स्थिति जारी रही, तो एक तिमाही में इन कंपनियों का कुल नुकसान लगभग ₹.1 लाखकरोड़ तक पहुंच सकता है। मंत्री के अनुसार, केवल एक तिमाही का घाटा ही FY26 के पूरे लाभ को समाप्त कर सकता है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया है।
सरकारी क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियां — Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum — चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में संयुक्त रूप से लगभग ₹.1.2 लाखकरोड़ के नुकसान की ओर बढ़ रही हैं। उद्योग से जुड़े अनुमान के अनुसार यह घाटा पहले लगाए गए अनुमान से काफी अधिक है। पहले बाजार विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया था कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगभग $120 प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो कंपनियों को प्रति माह लगभग ₹.27,000 करोड़ का नुकसान हो सकता है। हालांकि अभी कीमतें ज्यादातर $115 प्रति बैरल से नीचे बनी हुई हैं, फिर भी वास्तविक घाटा अनुमान से ज्यादा निकल रहा है।
ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण देश की ईंधन सुरक्षा और आपूर्ति स्थिरता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इस पर मंत्री ने कहा कि भारत के पास फिलहाल लगभग 60दिन तक की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त कच्चे तेल और LNG का भंडार मौजूद है। वहीं LPG का भंडार लगभग 45 दिन तक के लिए पर्याप्त बताया गया है। उन्होंने कहा कि संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए सरकार ने LPG उत्पादन बढ़ा दिया है। पहले प्रतिदिन लगभग 35,000 से 36,000 टन LPG का उत्पादन हो रहा था, जिसे बढ़ाकर अब करीब 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया गया है।

