Friday, February 13, 2026 |
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अमेरिका संग भारत का व्यापारिक शुद्ध लाभ 90 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

by Business Remedies
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India US trade agreement handshake and textile export containers

नई दिल्ली,

भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते के बाद भारत का वार्षिक व्यापार अधिशेष 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के साथ अतिरिक्त वार्षिक व्यापार अधिशेष कम से कम 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.1 प्रतिशत है। साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 3 अरब डॉलर की बचत संभव है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ हुए व्यापक व्यापार समझौतों के बाद अमेरिका के साथ यह समझौता भारत को एक विशिष्ट रणनीतिक स्थिति में पहुंचाता है। इससे देश और उसके निर्यातकों को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है, जबकि संवेदनशील मुद्दों पर कोई बड़ा समझौता नहीं किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, प्रारंभिक आकलन बताते हैं कि भारतीय निर्यातक अमेरिका को शीर्ष 15 वस्तुओं के निर्यात में एक वर्ष के भीतर 97 अरब डॉलर तक की वृद्धि कर सकते हैं। अन्य वस्तुओं को शामिल करने पर यह संभावित आंकड़ा 100 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, सेवाओं को छोड़कर अमेरिका के पास भारत से प्रतिवर्ष 50 अरब डॉलर से अधिक आयात की संभावना है। भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष वित्त वर्ष 2024-25 में 40.9 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर अवधि में यह 26 अरब डॉलर दर्ज किया गया। पूरे वर्ष के आधार पर यह 90 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। अमेरिका-बांग्लादेश समझौते पर रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका भारत और बांग्लादेश दोनों से लगभग 7.5 अरब डॉलर के वस्त्र आयात करता है, लेकिन दोनों देशों से आयातित वस्तुओं की संरचना अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, अमेरिका बांग्लादेश से बिना बुने परिधान अधिक आयात करता है, जबकि भारत से अन्य तैयार वस्त्र अधिक मात्रा में आयात किए जाते हैं।

हालिया अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौते के तहत बांग्लादेशी वस्तुओं पर शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि एक प्रावधान के तहत अमेरिका से कपास और कृत्रिम रेशा आधारित वस्त्र कच्चा माल आयात करने की मात्रा के आधार पर बांग्लादेश से कुछ वस्त्र और परिधान शून्य पारस्परिक शुल्क दर पर आयात किए जा सकते हैं। इससे आशंका जताई गई कि अमेरिकी बाजार में बांग्लादेशी वस्त्र अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं और भारतीय निर्यातकों पर प्रभाव पड़ सकता है।

लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका से कच्चा माल आयात करने की लागत भारत से आयात की तुलना में अधिक होगी, इसलिए भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कमजोर होने की संभावना कम है। यदि अमेरिका का कपास बांग्लादेश को भारत के कपास निर्यात का 10 प्रतिशत और कृत्रिम रेशा निर्यात का 2 प्रतिशत प्रतिस्थापित भी करता है, तो भारत को केवल लगभग 1 अरब डॉलर का मामूली नुकसान होगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूरोपीय संघ के साथ हालिया समझौते से भारत के लिए 260 अरब डॉलर के वस्त्र बाजार में शून्य शुल्क पर निर्यात का मार्ग खुल गया है, जिससे भारतीय वस्त्र उद्योग को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।



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