नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय महिला एवं बालिका विज्ञान दिवस के अवसर पर वेदांता लिमिटेड ने अपने कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर बड़ा लक्ष्य घोषित किया है। कंपनी ने बताया कि वर्तमान में उसकी स्टेम विषयों में फ्रेशर नियुक्तियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक है, जबकि नेतृत्व और प्रबंधन भूमिकाओं को मिलाकर यह आंकड़ा 45 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। अब कंपनी ने चालू वर्ष में स्टेम भूमिकाओं में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। धातु, खनन, विनिर्माण और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में परंपरागत रूप से पुरुषों का वर्चस्व रहा है। ऐसे में वेदांता की यह पहल लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 के लिए निर्धारित थीम के अनुरूप, जिसमें विज्ञान शिक्षा, नवाचार और नेतृत्व में समान भागीदारी पर जोर दिया गया है, कंपनी की यह घोषणा समयानुकूल मानी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार भारत में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों के स्नातकों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 40 से 45 प्रतिशत है, लेकिन वैश्विक कार्यबल में यह हिस्सा 30 प्रतिशत से भी कम है। विशेषकर धातु और खनन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय तक बेहद सीमित रही है।
वेदांता ने पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक भूमिकाओं में महिलाओं की उपस्थिति को नए स्तर पर पहुंचाया है। कंपनी ने भूमिगत खदानों में महिला कर्मियों की तैनाती, रात्रि पाली में कार्य की अनुमति और पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित एल्युमिनियम उत्पादन पंक्तियों जैसी पहलों को लागू किया है। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की अध्यक्ष और वेदांता लिमिटेड की गैर-कार्यकारी निदेशक प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी आत्मनिर्भर भारत की दिशा तय करेंगे और जब बेटियां इन क्षेत्रों में आगे बढ़ती हैं तो वे केवल भागीदारी नहीं करतीं, बल्कि नेतृत्व भी करती हैं। कंपनी के संचालन में आधुनिक डिजिटल तकनीकों को अपनाने से कार्यस्थल अधिक सुरक्षित और समावेशी बने हैं। स्वचालन, रियल टाइम निगरानी और मानकीकृत प्रक्रियाओं से खनन एवं धातु उद्योग में कार्य परिस्थितियां बेहतर हुई हैं। इससे महिलाओं के लिए रात्रि पाली में काम करना और तकनीकी भूमिकाओं में आगे बढ़ना आसान हुआ है।
वेदांता के विभिन्न कारोबारों में महिला वैज्ञानिक, इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ खनन, धातुकर्म, प्रक्रिया इंजीनियरिंग, पर्यावरण विज्ञान, डिजिटलीकरण और ऊर्जा तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका कार्य देश को महत्वपूर्ण खनिज, धातु तथा तेल और गैस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हो रहा है। कंपनी ने प्रतिभा रणनीति के तहत महिला अभियांत्रिकी महाविद्यालयों के साथ साझेदारी, इंटर्नशिप अवसर, नेतृत्व मंच और प्रगतिशील नीतियों को लागू किया है। इनमें जीवनसाथी को रोजगार सहायता, बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश, तथा प्रत्येक माह एक दिन घर से कार्य की सुविधा जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। राजस्थान और ओडिशा में कंपनी की इकाइयों में कार्यरत महिला भूवैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों ने उत्पादन, गुणवत्ता प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राजस्थान के बाड़मेर क्षेत्र में तेल क्षेत्र से जुड़े अभियानों में भी महिला विशेषज्ञों ने निर्णय आधारित ड्रिलिंग के माध्यम से लागत और समय में कमी सुनिश्चित की है, जिससे उत्पादन स्थिरता को बल मिला है।
सामाजिक प्रभाव कार्यक्रमों के माध्यम से कंपनी ने वर्ष 2021 के बाद से 50000 से अधिक महिलाओं और बालिकाओं तक विज्ञान शिक्षा से जुड़े प्रयास पहुंचाए हैं। राजस्थान में संचालित कार्यक्रमों के जरिए कई छात्राओं को अभियांत्रिकी शिक्षा में प्रवेश दिलाया गया है। वेदांता का कहना है कि समावेशी नियुक्तियां, डिजिटल परिवर्तन और सामुदायिक निवेश के माध्यम से वह ऐसी व्यवस्था बना रही है जहां विज्ञान क्षेत्र में महिलाएं औद्योगिक विकास, संसाधन सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में केंद्रीय भूमिका निभाएं।

