Tuesday, September 22, 2026 |
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चंद्रमा मिशन पर भारत की रणनीति, US के साथ सहयोग से पहले Autonomy पर जोर

NASA के Lunar Base प्रस्ताव पर भारत ने अपनाया सतर्क रुख, तकनीक और निर्णय क्षमता बनाए रखने की रणनीति

by Business Remedies
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India and NASA Moon Base collaboration strategy with lunar surface and spacecraft illustration

अंतरिक्ष सहयोग में भारत की प्राथमिकता
भारत ने US के प्रस्तावित स्थायी NASA Moon Base मिशन में भागीदारी को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। Australia आधारित policy think tank Lowy Institute की रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहयोग को अपनी स्वायत्तता बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहा है, न कि किसी अन्य देश द्वारा तय किए गए ढांचे में केवल एक junior partner बनने के तौर पर।

NASA के प्रस्ताव पर भारत का जवाब
रिपोर्ट के मुताबिक, Washington ने अगस्त में Bengaluru में आयोजित India-US Civil Space Joint Working Group बैठक के दौरान भारत को Lunar Base प्रोजेक्ट में सहयोग का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद US ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक स्तर पर भी आगे बढ़ाया। हालांकि, भारत ने अभी तक इस मिशन के लिए कोई विशेष फंडिंग या किसी Hardware योगदान की घोषणा नहीं की है।

वैश्विक साझेदारी में संतुलन की नीति
Lowy Institute की रिपोर्ट में कहा गया कि NASA ने भारत को Moon मिशन में शामिल होने का निमंत्रण दिया, जबकि भारत ने इसके विपरीत दुनिया को अपने Space Program में सहयोग के लिए आमंत्रित किया है। भारत France और Australia जैसे देशों के साथ Space Cooperation बढ़ा रहा है और BRICS के Remote-Sensing Constellation तथा प्रस्तावित BRICS Space Council जैसी पहलों का समर्थन कर रहा है।

ISRO और Private Sector की नई भूमिका
भारत की रणनीति में Private Space Players को Manufacturing और Advanced Technology Development में अधिक भूमिका देना शामिल है। इससे ISRO Exploration, Human Spaceflight, Strategic Missions और नई Frontier Technologies पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

Moon Mission में निर्णय क्षमता बनाए रखने पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत यह मूल्यांकन कर रहा है कि US के साथ सहयोग से उसे Technology Access, Commercial Opportunities और Global Space Standards में कितना प्रभाव मिलेगा। भारत Technical Standards, Data Sharing, Safety Practices और Lunar Resources के भविष्य के उपयोग में अपनी भूमिका सुनिश्चित करना चाहता है।

स्वायत्त अंतरिक्ष नीति की दिशा
भारत का रुख अनिर्णय नहीं बल्कि रणनीतिक सोच को दर्शाता है। भारत सहयोग के जरिए अनुभव और तकनीक हासिल करना चाहता है, लेकिन अपनी Space Policy और भविष्य की दिशा पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत Moon के भविष्य को आकार देने में योगदान देना चाहता है, लेकिन अपनी मंजिल पर नियंत्रण छोड़े बिना।



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