नई दिल्ली,
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती के बीच गुरुवार को सोना और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। मजबूत डॉलर के कारण बहुमूल्य धातुएं अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए महंगी हो गईं, जिससे मांग पर दबाव देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर अप्रैल वायदा सोना 0.24 प्रतिशत फिसलकर 10 ग्राम के लिए 1,58,371 रुपये पर आ गया। वहीं मार्च वायदा चांदी 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ प्रति किलोग्राम 2,61,124 रुपये पर कारोबार करती दिखी। कारोबार के दौरान दामों में सीमित उतार-चढ़ाव बना रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुख कमजोर रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी श्रम बाजार के मजबूत आंकड़ों ने डॉलर को सहारा दिया है। जनवरी में रोजगार वृद्धि उम्मीद से अधिक रही और बेरोजगारी दर घटकर 4.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि वहां की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति में है। ऐसे में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के पास ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रखने की गुंजाइश बन सकती है, जबकि वह महंगाई के रुख पर नजर बनाए रखेगा। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के जिंस विश्लेषक मानव मोदी ने कहा कि पिछले 13 महीनों में वेतनभोगी नौकरियों में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है, हालांकि संशोधित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में पहले बताए गए 5,84,000 की जगह केवल 1,81,000 नई नौकरियां जुड़ीं। इससे श्रम बाजार की वास्तविक स्थिति का आकलन संतुलित तरीके से करना जरूरी है।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण सोना और चांदी में हल्की तेजी देखी गई थी। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को लेकर आगे की रणनीति पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है, हालांकि तेहरान के साथ वार्ता जारी रहेगी। इन घटनाक्रमों से सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को समर्थन मिलता रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार में सोने को 1,56,000 रुपये के आसपास सहारा मिल रहा है, जबकि 1,60,500 रुपये के स्तर पर बाधा देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऊंचे स्तर से आई हालिया गिरावट को मुनाफावसूली माना जा रहा है, न कि किसी बुनियादी कमजोरी का संकेत। चांदी में भी तेज सुधार के बाद दाम एक दायरे में बने हुए हैं। मध्यम और दीर्घकाल में आपूर्ति संबंधी सीमाएं और औद्योगिक मांग इसके पक्ष में मानी जा रही हैं, हालांकि उतार-चढ़ाव ऊंचा बना रह सकता है।
निवेशक अब शुक्रवार को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़ों और ब्रिटेन की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इनसे वैश्विक मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। घरेलू सर्राफा बाजार के प्रतिभागी भी इन अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर आगे की रणनीति तय कर रहे हैं। फिलहाल stock market update में जिंस खंड पर दबाव दिखाई दे रहा है, जबकि nifty और sensex की चाल पर भी वैश्विक संकेतों का असर बना हुआ है।

