Friday, July 3, 2026 |
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वेदांता ने ऋण शोधन और विकास को बढ़ाने के लिए रु 30,000 करोड़ का कोष तैयार किया

by Business Remedies
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बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली
अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में वेदांता लिमिटेड ने क्वालिफाईड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेन्ट (क्यूआईपी), ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) और डिविडेंड (लाभांश) के माध्यम से रु 30,000 करोड़ का कोष तैयार किया है, जिससे ऋण शोधन और विकास को बढ़ाने में मदद मिलेगी, सूत्रों ने बताया।
सूत्रों के अनुसार वेदांता लिमिटेड के रु 8500 करोड़ क्यूआईपी, रु 3200 करोड़ का एचजैड़एल का ओएफएस और दूसरे अंतरिम लाभांश से रु 5100 करोड़ तथा रु 13,000 करोड़ के मौजूदा नकद भंडार के साथ कंपनी सभी धनराशि जुटाने के बाद रु 30,000 करोड़ का कोष तैयार कर लेगी।
वेदांता इस धनराशि का उपयोग अपने बैलेंस शीट में ऋण सुधार, पूंजी संरचना के सुधार तथा बदलावकारी परियोजनाओं के विकास के लिए करेगी, जिससे निकट अवधि में 10 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने और इनओर्गेनिक अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी, विश्लेषकों ने बताया। वेदांता मजबूत त्रैमासिक आंकड़ों का प्रदर्शन जारी रखे हुए है। पहली तिमाही में कंपनी का पीएटी (कर के बाद मुनाफा) 54 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा और त्रैमासिक रूप से भी रु 5095 करोड़ पर दोगुना हो गया।
कंपनी लांजीगढ़ में अब तक का सबसे अधिक एलुमिना उत्पादन और जिंक इंडिया युनिट में खनित धातु उत्पाद दर्ज किया गया। संरचनात्मक बदलावों एवं अन्य पहलों के चलते उत्पादन की कुल लागत में 20 फीसदी सालाना की कमी आई है। खनन की इस दिग्गज का द्धण 30 जून को रु 61,300 करोड़ था।
फरवरी और जून के बीच नॉन-कन्वर्टिबल डीबेंचर्स के निजी प्लेसमेन्ट और प्रोमोटर हिस्सेदारी की बिक्री से जुटाई गई राशि (कुल 4.4 फीसदी) भी निकट अवधि में सामुहिक स्तर पर ऋण में कमी लाने में योगदान देगी। सूत्रों ने बताया कि रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री, ऋण में कमी और संचालन दक्षता का अनुकूलन ऋण शोधन एवं नकद प्रवाह अनुकूलन की दिशा में वेदांता के प्रयासों को इंगित करता है। उम्मीद की जा रही है कि प्रस्तावित डीमर्जर और बदलावकारी परियोजनाओं की श्रृंखला से कंपनी को इन रूझानों को जारी रखने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं में कंपनी का मौजूदा निवेश वॉल्युम, इंटीग्रेशन तथा कारोबार में वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स की रेंज को बढ़ाने में मददगार होगा। इसी तरह कंपनी सुरक्षित ऋणदाताओं और स्टॉक एक्सचेंज से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद डीमर्जर की दिशा में अग्रसर है। इस योजना को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के साथ फाईल कर दिया गया है।
डी-मर्जर, जो सरल वर्टिकल विभाजन के रूप में नियोजित है, इससे विस्तार में बड़ा निवेश आकर्षित होगा और डीमर्जर के बाद हर कारोबार के विकास को सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसकी कॉर्पोरेट संरचना को सरल बनाने से सेक्टर उन्मुख स्वतन्त्र कारोबारों का निर्माण होगा, जिससे देशी-विदेशी निवेशकों को निवेश के अवसर मिलेंगे, जिनमें सॉवरेन वेल्थ फंड और सामरिक निवेशक भी शामिल होंगे।



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