Saturday, July 4, 2026 |
Home Commodityभारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता जून में भी बना अमेरिका, आयात में हुई बढ़ोतरी

भारत का सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता जून में भी बना अमेरिका, आयात में हुई बढ़ोतरी

by Business Remedies
0 comments
India Increases LPG Imports From US As America Remains Largest Supplier In June

भारत के लिए एलपीजी की सबसे बड़ी आपूर्ति करने वाला देश जून में भी अमेरिका बना रहा। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत लगातार अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता ला रहा है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए अपनी अग्रणी स्थिति बरकरार रखी है।

वस्तु विश्लेषण संस्था क्लेपर के आंकड़ों के अनुसार, जून में भारत ने अमेरिका से 773.78 हजार मीट्रिक टन एलपीजी का आयात किया। यह मई की तुलना में 19.4 प्रतिशत अधिक रहा। वहीं, जून में भारत का कुल एलपीजी आयात बढ़कर 1,191 हजार मीट्रिक टन पहुंच गया, जबकि मई में यह 1,155 हजार मीट्रिक टन था। यानी एक महीने में कुल आयात में 3प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। संयुक्त अरब अमीरात जून में भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आपूर्तिकर्ता रहा। वहां से आयात बढ़कर 157 हजार मीट्रिक टन हो गया, जो मई में 134.7 हजार मीट्रिक टन था। वहीं, सऊदी अरब और कुवैत ने जून के दौरान भारत को 64 हजार मीट्रिक टन-64 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की।

भारत द्वारा अमेरिका से एलपीजी आयात बढ़ाने के पीछे प्रमुख कारण हालिया पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान आपूर्ति में आई बाधाएं हैं। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने आयात स्रोतों का विस्तार किया है। इसी दिशा में सरकारी तेल शोधन कंपनियों ने 2026 से अमेरिका से हर वर्ष 22 लाख टन एलपीजी आयात करने के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है। इससे दोनों देशों के ऊर्जा संबंध और मजबूत होंगे तथा खाड़ी देशों पर निर्भरता भी कम होगी।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत ने अगस्त तक के लिए कच्चे तेल और एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने के बाद खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने लगी है, जिससे घरेलू उपलब्धता को लेकर बनी चिंताएं काफी हद तक कम हो गई हैं। ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए भारत अब केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ओमान, अर्जेंटीना, नाइजीरिया, अल्जीरिया और मिस्र जैसे देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ा रहा है। इससे किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी और भविष्य में आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भी घटेगा।

पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले भारत के लगभग 90प्रतिशत एलपीजी आयात हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते होते थे। इससे स्पष्ट होता है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र पर काफी अधिक निर्भर रही हैं। संघर्ष के दौरान आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारतीय तेल शोधन कंपनियों ने आयात के नए स्रोत तलाशने शुरू किए, ताकि भविष्य में भू-राजनीतिक जोखिमों का असर कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद भी भारत अपनी आयात विविधीकरण रणनीति जारी रखेगा। हालांकि खाड़ी देश आगे भी कच्चे तेल और एलपीजी के प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहेंगे, लेकिन भारत विभिन्न देशों से संतुलित आयात बनाए रखकर ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाने पर जोर देगा।



You may also like

Leave a Comment