Tuesday, June 30, 2026 |
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फेडरल रिजर्व की ब्याज दर चिंताओं के बीच सोना-चाँदी में तेज उतार-चढ़ाव, निवेशकों की बढ़ी सतर्कता

by Business Remedies
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Gold And Silver Prices Show Volatility Amid Federal Reserve Rate Hike Concerns

फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंकाओं और भू-राजनीतिक तनाव में कमी के बीच गुरुवार को सोना और चाँदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा, हालांकि कारोबार के दौरान खरीदारी भी देखने को मिली। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना वायदा ₹.1,40,672 प्रति10 ग्राम पर खुला। यह पिछले बंद भाव ₹.1,41,270 की तुलना में ₹.598 या 0.42 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत थी।

हालांकि बाद में खरीदारी बढ़ने से सोना संभला और कारोबार के दौरान ₹.719 या 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ ₹.1,41,989 के दिन के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। इसके बाद फिर बिकवाली हावी हुई और कीमत ₹.1,40,543 के निचले स्तर तक फिसल गई, जो पिछले बंद भाव से ₹.727 या 0.51 प्रतिशत कम थी। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चाँदी वायदा भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव का शिकार रही। चाँदी ₹.2,10,308 पर खुली, जो पिछले बंद भाव ₹.2,13,075 की तुलना में ₹.2,767 या 1.30प्रतिशत नीचे थी।

कारोबार के दौरान चाँदी ₹.2,10,043 के निचले स्तर तक पहुंची, जो पिछले बंद भाव से ₹.3,032 या 1.42 प्रतिशत कम थी। हालांकि बाद में इसमें भी सुधार देखने को मिला और चाँदी ₹.2,15,950 के उच्चतम स्तर तक पहुंची, जो ₹.2,875 या 1.34 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चाँदी दोनों दबाव में रहे। विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू और वैश्विक बाजारों में लगातार बिकवाली के कारण सोना करीब आठ महीनों के निचले स्तर के आसपास बना हुआ है, जबकि चाँदी दिसंबर के बाद के सबसे कमजोर स्तरों के करीब कारोबार कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती, जो एक वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, और फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर से फिर ब्याज दर बढ़ाने की बढ़ती संभावना ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा अमेरिकी प्रौद्योगिकी शेयरों में आई तेज गिरावट के बाद कई निवेशकों ने अन्य परिसंपत्तियों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सोना और चाँदी जैसी कीमती धातुओं में अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे बिकवाली और तेज हो गई।

विश्लेषकों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। इसके बावजूद बाजार की नजर अब अमेरिका के आगामी महंगाई आंकड़ों पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। इस बीच कच्चे तेल की कीमतों पर भी दबाव बना रहा। वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड लगभग 2प्रतिशत गिरकर करीब 72डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.83 प्रतिशत की गिरावट के साथ 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखाई दिया।



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