भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (FVCIs) के लिए Registration और उससे जुड़े शुल्कों के भुगतान की प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रस्ताव रखा है। इसके तहत अब शुल्क का भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय भारतीय रुपये में करने की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है।
SEBI का मानना है कि इस बदलाव से शुल्क संग्रह की प्रक्रिया अधिक सरल होगी, लेखांकन व्यवस्था बेहतर बनेगी और विदेशी मुद्रा में लेनदेन से जुड़ी परिचालन संबंधी चुनौतियां कम होंगी। इससे वित्तीय रिकॉर्ड का प्रबंधन भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो सकेगा। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान SEBI ने FPIs और FVCIs से Registration, निरंतरता और अन्य शुल्कों के माध्यम से कुल ₹11.16 करोड़ (लगभग 12.98 मिलियन अमेरिकी डॉलर, GST सहित) का संग्रह किया।
नियामक के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर में शुल्क प्राप्त होने के कारण लेखांकन और चालान तैयार करने की प्रक्रिया काफी हद तक मैन्युअल रहती है। इससे अधिक समय लगता है और वित्तीय रिकॉर्ड की वास्तविक समय में निगरानी करना कठिन हो जाता है। यही कारण है कि कई बार वित्तीय रिपोर्ट तैयार होने में भी देरी होती है। SEBI ने यह भी बताया कि विदेशी मुद्रा विनिमय शुल्क और धन प्रेषण शुल्क के कारण कई बार निर्धारित शुल्क से कम राशि प्राप्त होती है या फिर मिलान संबंधी विसंगतियां उत्पन्न हो जाती हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच लगातार समन्वय करना पड़ता है, जिससे समय और मानव संसाधनों की अतिरिक्त आवश्यकता होती है।
प्रस्ताव के अनुसार, FPIs और FVCIs पहले Registration से पहले भारतीय रुपये में निर्धारित राशि के बराबर पात्र विदेशी मुद्रा अपने नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागी (DDP) को जमा करेंगे। इसके बाद DDP को Registration स्वीकृत होने के 5कार्यदिवस के भीतर यह शुल्क SEBI को जमा कराना होगा। इसके साथ ही SEBI ने Category-I FPIs और FVCIs के Registration शुल्क को वर्तमान 2,500 अमेरिकी डॉलर के स्थान पर ₹.2.3 लाख निर्धारित करने का प्रस्ताव भी रखा है। नियामक विलंब से भुगतान पर लगने वाले शुल्क और नवीनीकरण शुल्क में भी बदलाव पर विचार कर रहा है।
वर्तमान में FPI का Registration 3वर्ष के लिए मान्य होता है, जबकि Swagat-FI मार्ग के तहत पंजीकृत विश्वसनीय FPIs को 10 वर्ष की वैधता मिलती है। वहीं FVCIs का Registration 5वर्ष तक प्रभावी रहता है। इसके अलावा SEBI ने FPI Registration में उपयोग होने वाले Common Application Form (CAF) में भी संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत आवेदकों के लिए जन्मतिथि और संस्थाओं के मामले में स्थापना तिथि, समझौता तिथि, ट्रस्ट डीड या साझेदारी गठन की तिथि जैसी जानकारी देना अनिवार्य किया जाएगा। नियामक का मानना है कि इससे Registration प्रक्रिया अधिक मजबूत होगी और आवेदकों से संबंधित जानकारी की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

