Saturday, July 4, 2026 |
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Banks में NRI जमा बढ़ी, RBI की नई योजना से विदेशी धन प्रवाह को मिला बढ़ावा

by Business Remedies
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RBI FCNR-B Scheme Boosts NRI Deposits In Indian Banks

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) की संशोधित Foreign Currency Non-Resident Bank (FCNR-B) जमा योजना लागू होने के बाद बैंकों में प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की जमा राशि में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि इस महीने जागरूकता बढ़ने के साथ विदेशी धन का प्रवाह और तेज़ होगा, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिलेगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक बैंक FCNR-B जमा योजना के माध्यम से लगभग 3 अरब-4 अरब अमेरिकी डॉलर जुटा चुके हैं। बैंक अधिकारियों का अनुमान है कि आने वाले सप्ताहों में यह प्रवाह और बढ़ेगा, विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की ओर से अधिक निवेश देखने को मिलेगा।

बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि संशोधित FCNR-B योजना के माध्यम से समय के साथ 40 अरब-50 अरब अमेरिकी डॉलर तक की नई जमा राशि आकर्षित हो सकती है। बैंकों का कहना है कि अधिक ब्याज दरें और आरबीआई द्वारा बैंकों की हेजिंग लागत वहन करने का निर्णय इस योजना को और अधिक आकर्षक बना रहा है। विदेशों में रहने वाले जमाकर्ताओं तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए बैंकों ने अपने अभियान तेज़ कर दिए हैं। विभिन्न देशों में एनआरआई ग्राहकों से सीधे संपर्क किया जा रहा है ताकि वे इस योजना में अधिक भागीदारी करें और विदेशी मुद्रा जमा में वृद्धि हो।

लघु वित्त बैंक 7.5 प्रतिशत तक की ब्याज दर पर FCNR-B जमा की सुविधा दे रहे हैं, जबकि बड़े बैंक लगभग 6.5 प्रतिशत तक ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। बेहतर ब्याज दरों के कारण इस योजना में प्रवासी भारतीयों की रुचि लगातार बढ़ रही है। बैंकरों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र से FCNR-B जमा में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और वे अपनी बचत भारत में सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं।

इस योजना में बढ़ती रुचि की प्रमुख वजह आरबीआई की जून में की गई घोषणा है, जिसके तहत 3 वर्ष से 5 वर्ष की अवधि वाले FCNR-B जमा पर बैंकों की हेजिंग लागत स्वयं आरबीआई वहन करेगा। इस कदम का उद्देश्य बैंकों को अधिक स्थिर विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए प्रोत्साहित करना और देश में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना है। इसके अलावा, आरबीआई ने 30 September 2026 तक कुछ अनिवासी जमा योजनाओं पर ब्याज दर से जुड़े प्रतिबंधों में अस्थायी राहत भी दी है। इसके तहत बैंक नई FCNR(B) और NRE जमा पर पहले की तुलना में अधिक ब्याज दे सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य विदेशी निवेश और बचत को आकर्षित करना, विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाना तथा भारतीय रुपया को समर्थन देना है।

नई व्यवस्था के अनुसार, 3वर्ष से अधिक और 5वर्ष तक की अवधि वाली नई FCNR(B) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा समाप्त कर दी गई है। वहीं, 3वर्ष या उससे अधिक अवधि वाली नई NRE जमा पर भी ब्याज दर संबंधी प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। पहले बैंकों को यह सुनिश्चित करना होता था कि NRE जमा पर दी जाने वाली ब्याज दर, समान अवधि की घरेलू रुपया सावधि जमा से अधिक न हो। वहीं 3 वर्ष से 5 वर्ष की FCNR(B) जमा पर ब्याज दर की एक निर्धारित सीमा लागू रहती थी। आरबीआई के इस फैसले से अब बैंकों को प्रवासी भारतीयों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देने की स्वतंत्रता मिलेगी। इससे विदेशी मुद्रा और भारतीय रुपया दोनों में जमा बढ़ने की संभावना है, जिससे देश की वित्तीय स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।



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