नई दिल्ली: भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में जनवरी-जून 2026 के दौरान संस्थागत निवेश में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अवधि में कुल निवेश 50प्रतिशत बढ़कर $ 4.5 बिलियन पहुंच गया, जो पिछले छह वर्षों में किसी भी पहली छमाही का सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद निवेशकों का भरोसा भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर कायम रहा।
रियल एस्टेट परामर्श कंपनी कोलियर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में भी निवेश का रुझान बेहद मजबूत रहा। इस दौरान संस्थागत निवेश 70प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ $ 2.9 बिलियन तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू निवेशकों ने बाजार में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने $ 2.6 बिलियन का निवेश किया, जो कुल निवेश का 57प्रतिशत रहा। वहीं, विदेशी निवेश 24प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ $ 1.9 बिलियन तक पहुंच गया।
कोलियर्स इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक बदल याग्निक ने कहा कि पिछले कुछ तिमाहियों से घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार 60प्रतिशत तक बनी हुई है। वहीं, विदेशी निवेशक अब पारंपरिक रियल एस्टेट परिसंपत्तियों के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाश रहे हैं और अधिक चयनात्मक रणनीति अपना रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 2026 की पहली छमाही में कार्यालय परिसंपत्तियां निवेशकों की पहली पसंद बनी रहीं। इस क्षेत्र में परिचालन कार्यालय परिसंपत्तियों में अधिकांश निवेश घरेलू निवेशकों ने किया।
इसके अलावा, मिश्रित उपयोग और वैकल्पिक परिसंपत्तियों में भी अच्छा निवेश देखने को मिला। दोनों क्षेत्रों में पहली छमाही के दौरान लगभग $ 0.8बिलियन-$ 0.8 बिलियन का निवेश हुआ और प्रत्येक की कुल निवेश में लगभग पांचवें हिस्से के बराबर भागीदारी रही।
आतिथ्य क्षेत्र ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इस क्षेत्र में निवेश बढ़कर $ 0.3 बिलियन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में तीन गुना से भी अधिक रहा। हालांकि, आवासीय क्षेत्र में संस्थागत निवेश में गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती लागत और मकानों की बिक्री की रफ्तार में कमी के कारण निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। इसके चलते इस क्षेत्र में निवेश 43 प्रतिशत घटकर $ 0.5 बिलियन रह गया।
क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, चेन्नई और बेंगलुरु ने संयुक्त रूप से लगभग $ 1.2 बिलियन का संस्थागत निवेश आकर्षित किया, जो 2026 की पहली छमाही के कुल निवेश का लगभग 27 प्रतिशत रहा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बहु-शहर लेनदेन का कुल संस्थागत निवेश में 46 प्रतिशत योगदान रहा। वहीं, टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी आतिथ्य, औद्योगिक और आवासीय परियोजनाओं में पूंजी निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे इन उभरते शहरों में रियल एस्टेट गतिविधियां और मजबूत हुई हैं।

