भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में H1 2026 के दौरान $1.13 बिलियन का Private Equity (PE) निवेश दर्ज किया गया। इस अवधि में Office Segment निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा और कुल निवेश का लगभग 89प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में आया। यह जानकारी नाइट फ्रैंक इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, Office Segment में निवेश पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 33 प्रतिशत बढ़ा है। लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों, वैश्विक क्षमता केंद्रों के विस्तार तथा उच्च गुणवत्ता वाली व्यावसायिक परिसंपत्तियों की उपलब्धता ने इस क्षेत्र को निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाया है।
एनसीआर इस अवधि में सबसे बड़ा निवेश केंद्र बनकर सामने आया। यहां कुल $411 मिलियन का निवेश हुआ, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में दर्ज $66 मिलियन की तुलना में 522 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा राजधानी क्षेत्र के व्यावसायिक रियल एस्टेट बाजार पर लगातार मजबूत हुआ है।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अंतरराष्ट्रीय साझेदार, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक स्तर पर उधार लेने की लागत तेजी से बढ़ी है। इसके कारण उभरते बाजारों में मिलने वाला अतिरिक्त लाभ पहले की तुलना में कम हुआ है। अब निवेशक केवल संभावित लाभ को नहीं, बल्कि परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन, कर व्यवस्था, नकदी उपलब्धता और वास्तविक प्रतिफल जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का Office Market लगातार मजबूती दिखा रहा है। वैश्विक क्षमता केंद्रों का विस्तार, कार्यालयों की बढ़ती मांग तथा संस्थागत स्तर की आधुनिक परिसंपत्तियों की उपलब्धता इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को और मजबूत बना रही है।
पुणे निवेश के मामले में दूसरे स्थान पर रहा, जहां $355.9 मिलियन का निवेश दर्ज किया गया। यहां चुनिंदा आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ कार्यालय और विनिर्माण केंद्र के रूप में बढ़ती पहचान ने निवेशकों को आकर्षित किया। वहीं चेन्नई में $154.7 मिलियन का निवेश हुआ। औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स तथा व्यावसायिक रियल एस्टेट क्षेत्रों की मजबूत स्थिति ने यहां निवेश गतिविधियों को बढ़ावा दिया।
बेंगलुरु में $115.9 मिलियन का निवेश दर्ज किया गया। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अग्रणी स्थिति, वैश्विक क्षमता केंद्रों का निरंतर विस्तार तथा मजबूत कार्यालय बाजार ने इसे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनाए रखा। रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक विकास यात्रा अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है। हालांकि, भविष्य में अधिक वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए ऐसी प्रतिस्पर्धी निवेश व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो मजबूत बाजार आधार के साथ निवेशकों को बेहतर सुविधा और भरोसा प्रदान कर सके।

