मुंबई में तेज़ी से बढ़ते पुनर्विकास कार्य आने वाले वर्षों में शहर के आवास क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2031 तक मुंबई में पुनर्विकास परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 59,000 नए घर बाजार में आ सकते हैं, जिनका कुल अनुमानित मूल्य करीब ₹.1,50,000 करोड़ होगा। शहर में अब अलग-अलग इमारतों के पुनर्विकास के बजाय बड़े क्लस्टर आधारित विकास मॉडल को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे अधिक संगठित और व्यापक शहरी विकास संभव हो सकेगा।
संपत्ति परामर्श कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि आवासीय सोसायटी पुनर्विकास परियोजनाओं से पूरे परियोजना काल के दौरान ₹.9,115 करोड़ से अधिक की स्टाम्प शुल्क आय सरकार को प्राप्त हो सकती है। यह न केवल रियल एस्टेट क्षेत्र को गति देगा, बल्कि सरकारी राजस्व में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। वर्ष 2026 की शुरुआत पुनर्विकास गतिविधियों के लिए बेहद मजबूत रही। वर्ष के पहले 90 दिनों के भीतर ही लगभग 70 डेवलपर समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो पूरे वर्ष 2025 में दर्ज कुल समझौतों के 30 प्रतिशत से अधिक के बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि मुंबई में पुनर्विकास को लेकर डेवलर्स और आवासीय सोसायटियों के बीच रुचि लगातार बढ़ रही है।
मुंबई में डेवलपर समझौतों की संख्या वर्ष 2020 के बाद पहली बार 1,050 के स्तर को पार कर गई है। वर्तमान में 1,094 सोसायटियां पुनर्विकास के विभिन्न चरणों में हैं, जिनके माध्यम से शहर भर में लगभग 432 एकड़ भूमि का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों में पुनर्विकास गतिविधियां सबसे अधिक केंद्रित हैं और कुल परियोजनाओं में इनकी हिस्सेदारी 95 प्रतिशत है। पश्चिमी उपनगरों में सबसे अधिक 773 सोसायटियां पुनर्विकास के तहत हैं, जबकि मध्य उपनगरों में 261 सोसायटियां इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इससे पता चलता है कि शहर का विस्तार अब पुराने आवासीय क्षेत्रों के नवीनीकरण के माध्यम से आगे बढ़ रहा है।
मुंबई में तेजी से बढ़ती जनसंख्या घनत्व और पुरानी होती आवासीय संरचनाएं पुनर्विकास की आवश्यकता को और अधिक बढ़ा रही हैं। शहर में लगभग 1.6 लाख इमारतें 30 वर्ष से अधिक पुरानी हैं और इन्हें संरचनात्मक जांच के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें सबसे अधिक 46 प्रतिशत इमारतें पश्चिमी उपनगरों में स्थित हैं, जबकि 28 प्रतिशत द्वीपीय शहर क्षेत्र और 26 प्रतिशत पूर्वी उपनगरों में हैं। मुंबई की जनसंख्या घनत्व लगभग 30,600 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो टोक्यो, न्यूयॉर्क सिटी और सिंगापुर जैसे वैश्विक महानगरों की तुलना में काफी अधिक मानी जाती है। इतनी अधिक आबादी वाले शहर में आधुनिक और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है, जिसे पुनर्विकास के माध्यम से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि March 2026 तक मुंबई की किराये की मांग में पुनर्विकास परियोजनाओं की हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत रही। पुनर्विकास के कारण अस्थायी आवास की आवश्यकता बढ़ने से किराये के बाजार को भी समर्थन मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 10,000 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर आधारित परियोजनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके पीछे डीसीपीआर 2034 और स्व-पुनर्विकास नीति जैसी नीतिगत सुधारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये नीतियां बड़े स्तर पर शहरी पुनर्निर्माण को प्रोत्साहित कर रही हैं। नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल के अनुसार, पुनर्विकास केवल नए घरों की आपूर्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह आधारभूत ढांचे के विकास, शहरी नवीनीकरण और आवासीय गुणवत्ता में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आने वाले वर्षों में मुंबई का रियल एस्टेट क्षेत्र पुनर्विकास के दम पर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

