Friday, July 3, 2026 |
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आरटीई के चयनित बच्चों को नहीं मिला स्कूलों में प्रवेश

by Business Remedies
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ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के बाद स्कूल खुल गए हैं, लेकिन हजारों बच्चों के लिए शिक्षा का द्वार अभी भी बंद है। नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत चयनित विद्यार्थियों को अभी तक निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं मिल पाया है। अभिभावक स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नतीजा शून्य। यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि शिक्षा के मौलिक अधिकार के साथ खिलवाड़ है।
आरटीई अधिनियम 2009 का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना था। 25 प्रतिशत सीटें निजी स्कूलों में आरक्षित करने का प्रावधान इसी दिशा में था, लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी चयनित बच्चों को प्रवेश दिलाने में सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। माता-पिता सुबह से शाम तक शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधनों के बीच भटक रहे हैं। कुछ स्कूल दस्तावेजों में खामियां बता रहे हैं, तो कुछ प्रशासनिक देरी का हवाला दे रहे हैं। नतीजतन, बच्चे स्कूल जाने की उम्र में घर बैठे हैं। पढ़ाई का नुकसान तो होगा ही, साथ ही उनके मन में शिक्षा प्रणाली के प्रति अविश्वास भी घर कर जाएगा।
यह समस्या केवल कुछ जिलों तक सीमित नहीं है। पूरे राज्य में हजारों बच्चे प्रभावित हैं। ग्रीष्मावकाश के बाद स्कूल खुलने का मतलब था कि बच्चे नियमित पढ़ाई शुरू करेंगे, लेकिन वास्तविकता उलट है। अभिभावकों में रोष स्वाभाविक है। वे पूछ रहे हैं कि जब चयन हो गया, ऑनलाइन लॉटरी हो गई, तो प्रवेश में देरी क्यों? क्या निजी स्कूल आरटीई को बोझ मानते हैं? क्या सरकारी अधिकारी जवाबदेही से बच रहे हैं?
सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि चयनित बच्चों का प्रवेश सत्र शुरू होने के 15 दिनों के अंदर सुनिश्चित किया जाए। स्कूलों पर जुर्माना लगाने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान लागू होना चाहिए। साथ ही, पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रवेश की प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न दोहराए।
आरटीई केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का माध्यम है। यदि हम गरीब बच्चों को शिक्षा से वंचित रखेंगे तो राष्ट्र निर्माण का सपना अधूरा रह जाएगा। समय आ गया है कि सरकार इस समस्या को गंभीरता से ले और चयनित हर बच्चे को स्कूल पहुंचाने की गारंटी दे। देरी हर दिन एक बच्चे का भविष्य अंधेरे में धकेल रही है। अब और इंतजार नहीं होना चाहिए।



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