देश के कई राज्यों में इस वर्ष मानसून की बारिश औसत से कम रहने के कारण कुछ राज्यों में खरीफ फसलों बाजरा, मूंग, ग्वार, मक्का, दलहन और तिलहन की बुवाई और उत्पादन पर असर पड़ा है। बाजार में अनाज और सब्जियों की आवक घटने से खाद्य महंगाई दर बढक़र 5 फीसदी या उससे अधिक तक पहुंच सकती है और पानी की कमी से मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। आने वाले गर्मी के मौसम में बांधों के नहीं भरने से पानी किल्लत भी आ सकती है। राजस्थान के लिए निर्णायक समय अगले 3-4 सप्ताह हैं। यदि इस अवधि में अच्छी बारिश नहीं होती है तो निश्चित रूप से गर्मी के मौसम में पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। बारिश के ना होने से जहां महंगाई पहले ही बढ़ रही है। इस वर्ष जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी और खाद्य महंगाई 5.52 फीसदी रही। अगस्त-सितंबर में बारिश हो जाती है तो महंगाई करीब 4-5 फीसदी के दायरे में रह सकती है। सब्जियों में प्याज, टमाटर आदि की कीमतों में पहले से ही तेजी है। अगर बारिश नहीं होती है तो उसमें और अधिक तेजी आने की पूरी संभावना है। यही स्थिति दालों और खाद्य तेलों की है। जुलाई में ही प्याज और अदरक जैसी खाद्य वस्तुओं ने महंगाई पर काफी दबाव देखा गया। कम बारिश से राजस्थान और अन्य राज्यों के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई काफी कम या देरी से हुई। इससे खेतों में हरी घास और चारे की कमी से पशुधन प्रभावित हुआ है, जिससे दूध और घी जैसे डेयरी उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। किसानों की कमाई घटने से ग्रामीण इलाकों में चीजों की मांग और स्थानीय कारोबार पर असर पड़ा है। पीने के साफ पानी की कमी और जगह-जगह गंदा पानी एकत्र होने से दूषित पानी की समस्याएं बढ़ रही हैं।

