देश में वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इस वर्ष सितंबर माह में सकल जीएसटी संग्रह 14.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 2.03 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है, जो देश में बढ़ते व्यापारिक गतिविधियों और औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार को दिखाता है। जहां जीएसटी संग्रह बढऩे से सरकार के पास राजस्व के दायरे में विस्तार होता है, जिससे देश के बुनियादी ढांचे सडक़, रेलवे, डिजिटल नेटवर्क और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड जुटाना आसान हो जाता है। वहीं आमजन को बढ़े हुए जीएसटी संग्रह का लाभ मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष रूप से मिलता है। मजबूत कर राजस्व से सरकार पर अतिरिक्त उधारी का दबाव कम हो सकता है और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की गुंजाइश बढ़ती है। वहीं मजबूत राजस्व प्राप्ति से सरकार को वित्तीय मजबूती मिलती है, जिससे वह भविष्य में कर दरों को युक्तिसंगत बनाने और आवश्यक वस्तुओं पर राहत देने जैसे जनहितकारी कदम उठा सकती है। इससे सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है और देश का राजकोषीय घाटा भी नियंत्रण में रहता है। जीएसटी संग्रह और अर्थव्यवस्था का गहरा संबंध है। व्यापार, उत्पादन, आयात और उपभोग बढऩे पर सामान्यत: जीएसटी संग्रह भी बढ़ता है। साथ ही ई-इनवॉइसिंग, ई-वे बिल और डिजिटल अनुपालन ने कर चोरी रोकने और डाटा बेस बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार को छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी अनुपालन और सरल बनाना होगा। फर्जी इनवॉइसिंग पर नियंत्रण, डेटा एनालिटिक्स का बेहतर इस्तेमाल, समय पर धनवापसी, विवादों का शीघ्र समाधान और कर आधार का विस्तार जरूरी है। लक्ष्य केवल अधिक जीएसटी वसूली नहीं, बल्कि ऐसी पारदर्शी कर व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें कारोबार सुगम हो और बढ़े हुए राजस्व का लाभ अंतत: देश के नागरिकों तक पहुंचे।

