बढ़ता औद्योगिक उत्पादन किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार होता है। भारत में औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है। इस वर्ष गत माह अगस्त में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो कि इसके पिछले महीने की तुलना में बेहतर है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि त्योहारी सीजन से पहले विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों में मांग तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष, 2021 के बाद से औद्योगिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार आया है। कोविड-19 महामारी के प्रभाव से प्रभावित उद्योगों ने दोबारा रफ्तार पकड़ी है और पिछले पांच वर्षों में औद्योगिक उत्पादन में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की संचयी वृद्धि दर्ज की गई है। उद्योगों में उत्पादन बढऩे से ना केवल जीडीपी ग्रोथ को समर्थन मिलता है, बल्कि रोजगार के अवसर, निवेश और निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होती है। वैश्विक स्थिति की बात करें तो तनावों के बीच भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। वैसे दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों की तुलना में भारत अभी चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों से पीछे है, लेकिन तेजी से बढ़ते इंडस्ट्रियल बेस के कारण भारत दुनिया के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग हब में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है। इसके लिए निरंतर सरकारी प्रयास भी जरूरी है। इस गति को बरकरार रखने के लिए सरकार को उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा की लागत को कम करना होगा ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पाद प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके अलावा युवाओं को आधुनिक तकनीक के अनुकूल प्रशिक्षित करने के लिए विशेष औद्योगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने होंगे। तकनीक आधारित नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों और शोध संस्थानों के बीच तालमेल मजबूत करना होगा। औद्योगिक मोर्चे पर यह सकारात्मक रुख भारत को विकसित भारत के संकल्प की ओर तेजी से अग्रसर कर रहा है।

