Monday, August 17, 2026 |
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बदलाव ही शाश्वत, अपरिहार्य और स्थिर है

by Business Remedies
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जो सामने है, वही जिंदगी है, वही न्यू और नेक्स्ट नॉर्मल है। सिर्फ एक पक्ति हमारे पूरे जीवन को परिभाषित करती है। यह पक्ति जीवन का सूत्र है। अगर कहीं जिंदगी उलझ जाए, लडख़ड़ा जाए तो यही याद रखिए, बदलाव ही शाश्वत है, अपरिहार्य है, स्थिर है। बदलाव ही गति भी है और इस बदलाव को अपनाना ही कर्म है।
परिस्थिति चाहे जो हो, जैसी भी हो, जीवन प्रक्रिया थम नहीं सकती। यह बात हमें प्रकृति से सीखनी चाहिए, कभी आपने देखा कि उगने से पहले सूरज ने इस बात की प्रतीक्षा की हो कि बादल छंट जाने के बाद वो उदय होगा। कभी चांद को देरी से आते-जाते देखा है या किसी रोज दिन ने अपने उगने का चक्र तोड़ दिया हो। नहीं, ऐसा कभी नहीं होता। इसलिए जिंदगी भी इसी चक्र के साथ चलना चाहिए, हर दिन एक नई रोशनी लेकर आता है, रात अगले दिन की उम्मीद लेकर आती है। सुख-दुख जिंदगी का अटूट हिस्सा है। यही नियति का चक्र भी है। अगर यह चक्र टूटा तो हम पीछे छूट जाएंगे। पिछड़ जाएंगे। वर्तमान से बिछड़ जाएंगे। अब यह जहर जिंदगी का स्थायी हिस्सा है। हमें इसके साथ रहना है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब हमें अपना तरीका बदल लेना है। यह तय करेगा कि हम कितनी सावधानी, कितनी सजगता और कितनी जागरूकता के साथ रहते हैं। कदम बढ़ाए बगैर हम जिंदगी को, अपनी काबिलियत को एक्सप्लोर नहीं कर सकते। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है वे लोग जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में कदम आगे रखे। अगर, दुनिया खोजने निकले नाविक समुद्री तूफानों से डरते, राह की भयानक कठिनाइयों से नहीं गुजरते तो दुनिया के नक्शे अधूरे होते, एक ही दायरे में सिमटकर रह जाते। सहज और सहूलियत से भरी परिस्थिति में कभी कोई आविष्कार नहीं हुआ, एक छोटे से बीज को भी जमीन में गाढक़र उस पर मिट्टी और खाद का बोझ उड़ेल दिया जाता है, महीनों तक अंधेरे से लड़ता हुआ जब वो पल्लवित होता है, पौधा बनता है, तभी फूल देता है। अगर वो अपने लिए किसी नॉर्मल परिस्थिति की प्रतीक्षा करता तो शायद कभी उपज नहीं पाता। जिंदगी भी ठीक ऐसी ही है। रिस्क लीजिए, लेकिन सतर्कता के साथ। निडरता से बाहर निकलिए, लेकिन सावधानी के साथ।



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