Sunday, October 11, 2026 |
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पशुओं के प्रति संवेदनशीलता व जिम्मेदारी की है जरूरत

by Business Remedies
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हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज विश्व पशु कल्याण दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस का मूल उद्देश्य पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, उनके साथ होने वाली क्रूरता को रोकना तथा उनके स्वास्थ्य, संरक्षण और बेहतर जीवन के प्रति समाज एवं सरकार की जिम्मेदारी को रेखांकित करना है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि पशु केवल मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति का साधन नहीं हैं, बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विश्व पशु कल्याण दिवस की शुरुआत का श्रेय जर्मनी के लेखक और पशु-अधिकार समर्थक हेनरिक जिमरमैन को दिया जाता है। इसका पहला आयोजन 24 मार्च, 1925 को बर्लिन में किया गया था। बाद में वर्ष, 1929 से इसे 4 अक्टूबर को मनाया जाने लगा। वर्ष, 1931 में फ्लोरेंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पशु संरक्षण सम्मेलन में 4 अक्टूबर को विश्व स्तर पर पशु दिवस के रूप में मान्यता देने के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया। जहां भारत में पशु कल्याण के लिए केंद्र सरकार और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड कई स्तरों पर कार्य कर रहे हैं। घायल एवं बचाए गए पशुओं के उपचार के लिए आर्थिक सहायता, वृद्ध, बेसहारा, घायल और बीमार पशुओं के लिए आश्रय गृहों को अनुदान, पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम, पशु एम्बुलेंस और प्राकृतिक आपदाओं के समय पशुओं को राहत प्रदान करने जैसी व्यवस्थाएं पशु कल्याण प्रयासों का हिस्सा हैं। इसके अलावा पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राष्ट्रीय गोकुल मिशन भी पशुओं के स्वास्थ्य और संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से टीकाकरण, रोगों की निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने, नस्ल सुधार और पशुपालकों को सहायता देने का प्रयास किया जाता है। लेकिन अब भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। सरकार को प्रत्येक जिले में 24 घंटे पशु एम्बुलेंस सेवा, आपातकालीन पशु चिकित्सा सुविधा, पर्याप्त आश्रय गृह और प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। पशुओं के अवैध परिवहन, क्रूरता और उपेक्षा के मामलों में कानूनों का कड़ाई से पालन भी जरूरी है। साथ ही विद्यालय स्तर से ही पशु संरक्षण, करुणा और जिम्मेदार पशुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए।



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