भारत के खुदरा रियल एस्टेट क्षेत्र ने वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन जारी रखा। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, देश के शीर्ष आठ शहरों में कुल खुदरा लीजिंग 2.4 मिलियन वर्गफुट दर्ज की गई, जो पिछली तिमाही की तुलना में 23.2 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 17.6 प्रतिशत अधिक रही। रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर गुणवत्ता वाले खुदरा स्थानों की सीमित उपलब्धता के बावजूद कारोबारियों की मांग लगातार बनी हुई है। यही कारण है कि खुदरा रियल एस्टेट क्षेत्र में लीजिंग गतिविधियों में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है।
वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान कुल लीजिंग 4.35 मिलियन वर्गफुट रही, जो वर्ष 2025 की पहली छमाही की तुलना में 3.1 प्रतिशत अधिक है। लगातार दूसरी तिमाही में कोई नया ग्रेड ए मॉल बाजार में नहीं आया, जिससे प्रीमियम खुदरा स्थानों की उपलब्धता सीमित बनी रही। वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में पूरे हुए परियोजनाओं में खुदरा स्थानों की मांग मजबूत रही। इससे यह स्पष्ट होता है कि कारोबारी अब भी संगठित खुदरा प्रारूपों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्रीमियम मॉल में सीमित स्थान और लगातार बढ़ते किराये के कारण कई कारोबारियों ने ग्रेड ए परिसंपत्तियों के अलावा चुनिंदा ग्रेड बी परियोजनाओं की ओर भी रुख करना शुरू किया। कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 51.3 प्रतिशत रही, जो 1.23 मिलियन वर्गफुट के बराबर है। यह आंकड़ा पिछली तिमाही की तुलना में 33.4 प्रतिशत तथा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 21.9 प्रतिशत अधिक रहा। मुख्य बाजार क्षेत्रों में भी कारोबारियों की रुचि मजबूत बनी रही। कुल लीजिंग में इनकी हिस्सेदारी 48.7 प्रतिशत रही, जो 1.17 मिलियन वर्गफुट के बराबर है। हालांकि हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई, लेकिन लीजिंग की मात्रा पिछली तिमाही की तुलना में 14.0 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 13.3 प्रतिशत बढ़ी। इसकी प्रमुख वजह अधिक ग्राहकों वाले प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों की लगातार बढ़ती मांग रही।
घरेलू कारोबारियों का दबदबा इस दौरान भी कायम रहा। कुल लीजिंग में उनकी हिस्सेदारी 82.4प्रतिशत रही, जिसमें से लगभग 54प्रतिशत गतिविधियां मुख्य बाजार क्षेत्रों में केंद्रित रहीं। वहीं, विदेशी कारोबारियों की हिस्सेदारी 17.6 प्रतिशत रही और उनकी लगभग 76 प्रतिशत लीजिंग मॉल में हुई। इससे स्पष्ट है कि विदेशी कारोबारी बेहतर प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता और बेहतर ग्राहक अनुभव वाले खुदरा परिसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुशमैन एंड वेकफील्ड के गौतम साराफ ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण खुदरा स्थानों की सीमित उपलब्धता के बावजूद कारोबारी अच्छी लोकेशन वाली परिसंपत्तियों के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि खाली स्थानों की संख्या घटी है, किराये मजबूत हुए हैं और प्रमुख शहरों में लीजिंग गतिविधियों में तेजी बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नए खुदरा स्थानों की धीरे-धीरे बढ़ती उपलब्धता और उपभोक्ता मांग में लगातार वृद्धि से गुणवत्तापूर्ण खुदरा स्थानों की उपलब्धता बेहतर होगी। इससे कारोबारियों को विस्तार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। शहरों की बात करें तो दिल्ली एनसीआर, मुंबई और हैदराबाद ने मिलकर दूसरी तिमाही की कुल लीजिंग में 64 प्रतिशत योगदान दिया। इनमें दिल्ली एनसीआर में 0.67 मिलियन वर्गफुट, मुंबई में 0.50 मिलियन वर्गफुट और हैदराबाद में 0.37 मिलियन वर्गफुट लीजिंग दर्ज की गई। कारोबारी श्रेणियों में सबसे अधिक हिस्सेदारी फैशन क्षेत्र की रही, जिसने कुल लीजिंग में 28.2 प्रतिशत योगदान दिया। इसके बाद खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र का स्थान रहा, जिसकी हिस्सेदारी 17.2 प्रतिशत दर्ज की गई।

