बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली
हमारे जीवन का रिटायरमेंट फेज एक ऐसी अवस्था है, जहां हम पारंपरिक कामों की दिनचर्या को अलविदा कहते हैं और एक नया अध्याय शुरू करने के लिए निकलते हैं। यह एक बेहतरीन फेज है, जहां हम अपने कई सपनों और इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं, जो कामकाजी साल के दौरान रुके हुए थे। चाहे वह जगह जगह यात्रा करना हो, खुद की इच्छा से कोई सेवा देना हो, कोई नया स्किल सीखना हो, लंबे समय से रुके हुए किसी पसंदीदा शौक को पूरा करना हो या दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना हो, रिटायरमेंट एक नियमित तौर पर कामकाजी जीवन से हटकर एक अपना अलग तरह से अस्तित्व बनाने के साथ ही संतुष्टि वाले जीवन जाने का अवसर प्रदान करता है।
सांस्कृतिक रूप से, हम भारतीयों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग कभी भी प्राथमिकताओं की लिस्ट में टॉप पर नहीं थी। लेकिन एक अध्ययन से पता चला है कि पिछले कुछ सालों में फोकस बदल गया है और अब यह आज की 35 से 50 साल की कामकाजी आबादी की शीर्ष वित्तीय प्राथमिकताओं में 6वें स्थान पर है।
कुछ कारण जिनकी वजह से आज रिटायरमेंट प्लानिंग इतनी महत्वपूर्ण हो गई है :
एक समृद्ध रिटायरमेंट लाइफ : रिटायरमेंट को जीवन का एक नीरस फेज नहीं माना जाता है, जिसमें आगे के सालों के लिए कुछ भी दिलचस्प न हो। लोग जीवन की दूसरी पारी को नए उत्साह के साथ शुरू करते हैं और इसे अपने जुनून को आगे बढ़ाने और कई अधूरे सपनों को पूरा करने का एक अवसर मानते हैं।
मेडिकल बिल को ध्यान में रखना : हेल्थ एक्सपेंस निर्विवाद हैं और यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिस पर प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, खासकर रिटायरमेंट फेज के दौरान। इसके साथ ही महंगाई के फैक्टर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जीवन भर चलने वाला इनकम सोर्स : एक व्यापक फाइनेंशियल रिटायरमेंट प्लान के साथ, वर्किंग ईयर के दौरान बनाए गए फंड के खत्म होने की आशंकाओं से निपटना आसान।
आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना : रिटायरमेंट फंड के लागू होने से, जोखिम वाला फैक्टर खत्म हो जाएगा और वित्तीय रूप से किसी पर निर्भरता नहीं रहेगी, चाहे वह बच्चों, परिवार के सदस्यों या दोस्तों पर हो।
अनुमानित उम्र (जीवन प्रत्याशा) में बढ़ोतरी : एक प्रमुख मीडिया चैनल द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि 1947 के बाद से भारत में जीवन प्रत्याशा में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पारंपरिक पारिवारिक संरचनाओं के धीरे धीरे खत्म होने के साथ-साथ, लोगों के लिए समय रहते ही अपने लिए रिटायरमेंट प्लानिंग करना जरूरी हो गया है।
समय से पहले रिटायरमेंट का विकल्प : बहुत से लोगों में 60 की उम्र तक काम करने का उत्साह नहीं हो सकता है। द फायर – फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस, रिटायर अर्ली जैसी धारणा अब घटना, मिलेनियल (1981 से 1996 के बीच जन्म लेने वालों) और जेन जेड (1995 से 2010 के बीच जन्म लेने वालों) आबादी के बीच लोकप्रियता हासिल कर रही है। अगर कम उम्र में रिटायरमेंट की योजना बनाई जाती है, तो यह अपना खुद का कारोबार शुरू करने का सही अवसर बनाता है। पिछले साल किए गए एक सर्वे से पता चला है कि 67 फीसदी भारतीय समय से पहले रिटायरमेंट पर विचार कर रहे हैं, कुछ लोग इसे 33 साल की आयु तक ही सीमित मान रहे हैं।
जीवन में किसी इमरजेंसी स्थिति पर काबू पाना : किसी के साथ भी बिना वजह ही इमरजेंसी की स्थिति आ सकती है। एक रिटायरमेंट फंड यह सुनिश्चित करेगा कि उस परिस्थिति को तुरंत और भरोसे के साथ हल किया जा सकता है।
रिटायरमेंट प्लानिंग को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है। आम धारणा यह है कि लाइफ इंश्योरेंस, पॉलिसीधारक की असामयिक मृत्यु की स्थिति में, परिवार के सदस्यों को एक सुरक्षा वाला वित्तीय ढाल प्रदान करता है। हालांकि यह भी निश्चित रूप से सच है, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी एक रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह कम जोखिम वाले फंड विकल्प, टैक्स लाभ लेने के लिए भी बेहतर हैं और इसलिए रिटायरमेंट जैसे लक्ष्य-आधारित बचत के लिए इंश्योरेंस बेहतर विकल्प हैं।
पीयूष त्रिवेदी, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस में पार्टनर चैनल्स के लिए चीफ डिस्ट्रीब्यूटर ऑफिसर (सीडीओ)

