बिजनेस रेमेडीज/बेंगलुरु। स्टोन कारोबार के क्षेत्र में ‘स्टोना’ दुनिया की सबसे बड़ी स्टोन प्रदर्शनी है। स्टोना का 16वां संस्करण ‘स्टोना 2025’ कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु में शानदार आगाज की ओर बढ़ रहा है। चार दिवसीय स्टोन प्रदर्शनी का समापन कल होगा।
स्टोन प्रदर्शनी का आयोजन इस क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कारोबारी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन ग्रेनाइट एंड स्टोन इंडस्ट्री (फिग्सी) द्वारा किया जा रहा है। जबकि कर्नाटक सरकार आयोजन की सह-संयोजक है। यहां पर दुनिया भर के 500 से अधिक प्रदर्शकों से नवीनतम पत्थर के रुझानों, उत्पादों, उपकरणों, मशीनरी, एब्रेसिव, सीलेंट और बहुत कुछ के संबंध में जानकारी हासिल की जा सकती है। राजस्थान से भी बड़ी संख्या में स्टोन, मशीनरी व अन्य उद्यमियों ने स्टोन प्रदर्शनी ‘स्टोना 2025’ में स्टॉल्स लगाई है।
बिजनेस रेमेडीज की टीम ने स्टोना 2025 और स्टोन इंडस्ट्री की दिक्कतों के संबंध में अनुभवी स्टोन कारोबारी श्री बनारसी मार्बल स्टोन प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर, हितेश पटेल से बात की। उन्होंने बताया कि ‘स्टोना 2025’ में कई प्रकार की स्टोन मशीनरी देखने को मिली। देश-विदेश के स्टोन कारोबारियों ने आयोजन में शिरकत की। यहां पर एक ही छत के नीचे पूरी स्टोन इंडस्ट्री देखने को मिली। इस प्रकार के आयोजन से स्टोन इंडस्ट्री में संपर्क बढऩे का फायदा कारोबार में मिलता है। मैं सफल आयोजन के लिए आयोजकों को धन्यवाद देता हूं।”
स्टोन इंडस्ट्री की दिक्कतों के संबंध में उन्होंने बताया कि ” विगत कुछ वर्षों से मार्बल उद्योग कई समस्याओं से जूझ रहा है। एक अनुमान के अनुसार मार्बल पर खुली आयात नीति लागू होने से पहले जहाँ प्रतिवर्ष प्रतिबंधित मात्रा में मार्बल आयात करने का लाइसेंस केवल मार्बल उद्योग में कार्यरत फर्मों को जारी किया जाता था लेकिन 2017-18 में खुली आयात नीति (ओजीएल) लागू होने के पश्चात कई लाख टन मार्बल आयात किया जा चुका है। जिसका सीधा असर स्थानीय खनन क्षेत्रों पर हुआ है। कई मार्बल माइंस बंद हो चुकी है और जो संचालित हैं,वह भी बंद होने के कगार पर हैं। राजस्थान की अधिकांश जनसंख्या खनन उद्योग पर निर्भर है जिन्हें रोजी रोटी का संकट है।
जीएसटी लागू होने के पूर्व राजस्थान में मार्बल पर 5 फीसदी वेट लगता था और अन्य राज्यों में 12 फीसदी और 18 फीसदी वेट लगता था। जीएसटी लागू होने के पश्चात सभी क्षेत्र के मार्बल को 18 फीसदी जीएसटी की श्रेणी में सम्मिलित कर दिया गया। जिससे राजस्थानी मार्बल को अत्यधिक हानि हो रही है और यह उद्योग निरंतर मंदी की ओर अग्रसर है।
कई राज्य सरकारों द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए है कि लघु उद्योग स्थापना की प्रक्रिया में तय वर्षों तक किसी भी विभाग से एनओसी लेने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन पीएफ, ईएसआईसी, फॉरेस्ट, पोल्युशन आदि विभाग इस निर्देश को मानने को तैयार नहीं है। एकल विंडो सिस्टम द्वारा उद्योग स्थापना की अनुमति के दौरान ही यदि इन विभागों द्वारा आपत्ति दर्ज कर दी जावे तो उनका निराकरण किया जा सकेगा, लेकिन उद्योग चलायमान होने के पश्चात इन विभागों द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई जाती है जिससे उद्योग संचालन के वक्त ही बंद होने के कगार पर आ जाते हैं।
वर्तमान में कई राज्यों के ऐसे औद्योगिक क्षेत्र विद्यमान है जिनके चारों तरफ आवासीय कालोनियां बस चुकी हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के चारों ओर आवासीय योजना का लगातार विस्तार हो रहा है। उद्योग में प्रयोग की जाने वाली भूमि उपलब्ध नहीं होने से कई उद्योग निरंतर अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। नए औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर सरकारों द्वारा को ठोस प्रयास भी नहीं किए जाते हैं जिससे उद्योगों का विस्तारीकरण नहीं हो रहा है। उद्योग संचालन में सबसे बड़ी भूमिका बिजली उपलब्धता की रहती है। सभी राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध हो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।”

