नई दिल्ली। भारत अब केवल कम लागत वाले विनिर्माण पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमताओं का निर्माण करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। एक नई Report के अनुसार, मुद्रा के वास्तविक मूल्य में गिरावट, वैश्विक व्यापार तक बढ़ती पहुंच और रिकॉर्ड स्तर के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के कारण देश के विनिर्माण क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव की गति और तेज हो सकती है। Carnelian Asset Management and Advisors की Report के अनुसार, भारत के पहले विनिर्माण-केंद्रित निवेश कोष ने वर्ष 2020 में शुरुआत के बाद से 32 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर दर्ज की है। Report में कहा गया है कि देश में Manufacturing 2.0 का नया दौर वास्तविक रूप से शुरू हो चुका है और आगामी वर्षों में कई सकारात्मक कारकों के संयुक्त प्रभाव से इस क्षेत्र में तेज वृद्धि देखने को मिल सकती है।
Report के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाओं, रक्षा निर्यात, औषधि उद्योग, अनुबंध विकास एवं विनिर्माण सेवाओं, वाहन कलपुर्जा उद्योग, वस्त्र तथा परिधान क्षेत्र में उल्लेखनीय अवसर मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में बढ़ती वैश्विक मांग और भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता भविष्य में निवेश और उत्पादन दोनों को मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। Report में कहा गया है कि भारतीय मुद्रा के वास्तविक प्रभावी विनिमय दर में आई गिरावट निर्यात को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पिछले तीन दशकों में जब-जब वास्तविक प्रभावी विनिमय दर में गिरावट दर्ज की गई, तब-तब भारतीय निर्यात में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली। December 2024 से April 2026 के बीच वास्तविक प्रभावी विनिमय दर में लगभग 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो वर्ष 1990 के शुरुआती दशक के बाद सबसे बड़ी लगातार गिरावट मानी जा रही है।
वैश्विक व्यापार तक भारत की पहुंच भी तेजी से बढ़ी है। Report के अनुसार, भारत को अब लगभग 9ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वैश्विक आयात बाजार तक वरीयतापूर्ण पहुंच प्राप्त हो चुकी है, जिससे घरेलू उद्योगों के लिए निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं। इसके अलावा, Union Budget 2026-27 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹.12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। यह लगभग एक दशक पहले की तुलना में चार गुना अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे पर बढ़ता सरकारी निवेश विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देगा और निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा।
Report में कहा गया है कि सबसे बड़े धन सृजन के अवसर अक्सर उस समय सामने आते हैं, जब बाजार अभी संरचनात्मक बदलावों के महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पाता। ऐसे समय में दीर्घकालिक निवेशकों को बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
भारत में मोबाइल फोन उत्पादन का मूल्य लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार कर चुका है, जबकि IPhone का निर्यात लगभग 17 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। वर्तमान में Apple अपने वैश्विक IPhone उत्पादन का 20 प्रतिशत से अधिक भारत में संयोजित कर रही है, जो देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। अनुकूल सरकारी नीतियां, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण, घरेलू मांग में लगातार वृद्धि, बुनियादी ढांचे में निवेश तथा प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में सुधार जैसे कारक मिलकर भारत में विनिर्माण क्षेत्र के लिए मजबूत विकास चक्र तैयार कर रहे हैं। हालांकि क्रियान्वयन से जुड़े कुछ जोखिम अभी भी मौजूद हैं, फिर भी Report का मानना है कि भारत अब कई वर्षों तक चलने वाले औद्योगिक विस्तार के चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां निवेशकों और उद्योगों के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।

