नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते Geopolitical Tension के बावजूद भारत को फिलहाल ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी किसी तत्काल समस्या का सामना करने की संभावना नहीं है। उद्योग विशेषज्ञों और विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार और अलग-अलग देशों से आपूर्ति की व्यवस्था के कारण भारत अपनी निकट अवधि की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की मजबूत स्थिति में है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तनाव के कारण International Market में Crude Oil Prices बढ़ सकती हैं। इसका प्रभाव सितंबर और अक्टूबर में होने वाली कच्चे तेल की खरीद पर दिखाई दे सकता है और भारत की आयात लागत बढ़ सकती है। इसके बावजूद देश की तत्काल Energy Security सुरक्षित बनी हुई है।
भारत अगस्त के लिए आवश्यक कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर चुका है। इसके साथ ही रसोई गैस के आयात की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है। इस कारण निकट भविष्य में घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका बेहद कम मानी जा रही है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इन चुनौतियों का प्रभाव सीमित रहेगा और सरकार तथा ऊर्जा कंपनियां वैकल्पिक Import Sources के माध्यम से स्थिति को संभाल सकती हैं।
रविवार को होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद Shipping Traffic में तेज गिरावट दर्ज की गई। होरमुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा Global Oil Market पहले के मुकाबले आपूर्ति संकट का सामना करने के लिए अधिक मजबूत स्थिति में है। तेल निर्यातक देशों के संगठन से बाहर के देशों में उत्पादन बढ़ा है। इसके अतिरिक्त, भारत ने भी किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों का विस्तार किया है।
सोमवार को Brent Crude की कीमत में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़े सैन्य तनाव और संभावित आपूर्ति बाधाओं की आशंका के कारण देखने को मिली। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले बताया था कि भारत के पास लगभग 60 दिन की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, देश के पास लगभग 60 दिन का तरलीकृत प्राकृतिक गैस भंडार और करीब 45 दिन का रसोई गैस भंडार भी मौजूद है।
अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा तनाव के बावजूद औद्योगिक उपभोक्ताओं को दी जा रही रसोई गैस और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति संबंधी राहत में तत्काल किसी बदलाव की योजना नहीं है। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति व्यवस्था की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर से 15 डॉलर तक का अतिरिक्त Risk Premium जुड़ सकता है। ऐसी स्थिति में Brent Crude की कीमत 80 डॉलर से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच सकती है।
ताजा तनाव उस समय बढ़ा जब अमेरिका और ईरान के बीच रविवार को नए सैन्य हमले हुए। तेहरान द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक जहाज पर हमला किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया। इससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर हुई हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव सीमित अवधि तक रहता है तो भारत की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर इसका बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगातार वृद्धि से देश का आयात खर्च बढ़ सकता है, जिसका असर परिवहन लागत, ईंधन कीमतों और महंगाई पर दिखाई दे सकता है।
Stock Market: ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर तेल विपणन, विमानन, परिवहन, पेंट और रसायन क्षेत्र की कंपनियों पर दिखाई दे सकता है। निवेशकों की नजर Nifty, Sensex, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की चाल पर बनी रहेगी।

