भारत चंद्रयान मिशन की ओर निरंतर आगे बढ़ रहा है। इसरो ने उपग्रह प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अन्वेषण और राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की शुरुआत करके भारत की तस्वीर बदल दी है। चंद्रयान-3 मिशन ने आज के दिन ही वर्ष, 2023 को चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग पूरी की। इसके साथ ही भारत चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा और चंद्रमा के दक्षिणी धु्रवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला पहला देश बन गया है। सॉफ्ट लैंडिंग के बाद प्रज्ञान रोवर की सफल तैनाती हुई। लैंडिंग स्थल का नाम शिव शक्ति बिंदु (स्टेशन शिव शक्ति) रखा गया और 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित किया गया। आज भारत अपना दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाएगा। यह दिवस वर्ष,1969 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की अविश्वसनीय उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने और पूरे भारत में वैज्ञानिक नवाचार और अंतरिक्ष शिक्षा को सक्षम बनाने के लिए इसरो का सम्मान करता है। यह अंतरिक्ष अन्वेषण में दुनिया भर में भारत के बढ़ते कदम का प्रतीक है। इसरो की समयरेखा पर प्रमुख अवसरों वर्ष, 1975 में आर्यभट्ट का प्रक्षेपण, जो पहला भारतीय उपग्रह था और चंद्रयान, मंगलयान तथा आदित्य-एल1 जैसे कुछ ऐतिहासिक मिशन शामिल हैं। इसरो ने कृषि, आपदा प्रबंधन और शिक्षा जैसे राष्ट्रीय विकास के अन्य व्यापक क्षेत्रों के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया है।
यह दिवस अदम्य अनुसंधान भावना का सम्मान करता है और आने वाली पीढ़ी को विज्ञान, उत्कृष्टता और आगे की खोज की ओर प्रेरित करता है। आज आयोजित इसरो दिवस की थीम है- एक सतत भविष्य के लिए अग्रणी अंतरिक्ष नवाचार रहेगा। यह विषय राष्ट्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के हित में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान में नए आयाम स्थापित करने के इसरो के प्रयास पर जोर देता है। इसरो के नवाचारों के लाभों में टेलीमेडिसिन, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं, जो आधुनिक राष्ट्रीय प्रगति और अंतरराष्ट्रीय मान्यता का आधार हैं।

