अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सोमवार को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई। मध्य-पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग ₹. 6,880 प्रति बैरल के स्तर के आसपास पहुंच गईं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों की चिंता भी गहरा गई है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल 4 प्रतिशत से अधिक यानी लगभग ₹. 282 प्रति बैरल की बढ़त के साथ लगभग ₹. 6,880 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 4.55 प्रतिशत यानी लगभग ₹. 279 की बढ़त के साथ ₹. 6,419.47 प्रति बैरल तक पहुंच गई।
इस तेजी की मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को अगले आदेश तक बंद किए जाने का दावा बताया जा रहा है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि रणनीतिक जलमार्ग में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई की गई है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की चिंता उस समय और बढ़ गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम युद्धविराम समझौता और समझौता ज्ञापन अब प्रभावी नहीं रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता अभी भी जारी है।
रविवार को अमेरिकी सेना ने सटीक हथियारों की सहायता से ईरान के कई ठिकानों पर एक साथ दर्जनों हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार यह कार्रवाई ईरान द्वारा साइप्रस के ध्वज वाले एक कंटेनर जहाज पर किए गए हमले के जवाब में की गई। बीते एक सप्ताह के दौरान यह ईरान के खिलाफ अमेरिका की चौथी बड़ी सैन्य कार्रवाई रही। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने एक बार फिर व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने ईरान की एक क्रूज़ मिसाइल और एक हमलावर ड्रोन को रास्ते में ही मार गिराया।
लगातार बढ़ते इस सैन्य टकराव ने आशंका पैदा कर दी है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक मध्य-पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इसका असर वैश्विक महंगाई, ईंधन कीमतों और आर्थिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है। इस घटनाक्रम का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को Sensex और Nifty दोनों गिरावट के साथ खुले और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 6 प्रतिशत तक की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

