भारत मेंं एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का चलन बढ़ता जा रहा है। अभी ई20 यानी 2० फीसदी एथेनॉल प्लस 80 फीसदी पेट्रोल वाला फ्यूल लागू किया है। टार्गेट 2030 से पहले 2025 में ही पूरा कर लिया गया है। इसके उपयोग करने से फायदे ज्यादा, जबकि नुकसान कम है। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का उद्देश्य केवल ईंधन बनाना नहीं है, बल्कि तेल आयात कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय को बढ़ाना भी है। एथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन है। इससे कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ अन्य हानिकारक उत्सर्जन कम हो सकते हैं। एथेनॉल का ऑक्टेन रेटिंग पेट्रोल से अधिक होता है, जिससे इंजन में नॉकिंग कम हो सकती है। एथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जा सकता है, जिससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी। हालांकि इसके उपयोग से वाहनों माइलेज में कमी आ सकती है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से लगभग 30-35 फीसदी कम होती है। इसलिए ई20 पर माइलेज आमतौर पर लगभग ३-7 फीसदी तक घट सकता है, हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन और ड्राइविंग शैली पर निर्भर करता है। वहीं पुराने मॉडल के वाहन में रबर पाइप, सील, फ्यूल पंप और कुछ धातु के हिस्सों पर अधिक घिसाव या क्षरण का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा बहुत ठंडे क्षेत्रों में अधिक एथेनॉल मिश्रण से इंजन स्टार्ट करने में कठिनाई हो सकती है, हालांकि भारत के अधिकांश हिस्सों में इसका प्रभाव सीमित रहता है। नए ई20-समर्थित वाहनों में इन समस्याओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसके उपयोग से केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय को फायदा पहुंचने की पूरी उम्मीद है। इससे कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी। एथेनॉल मिश्रण बढऩे से विदेशी मुद्रा की बचत होगी। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति पर निर्भरता कुछ हद तक कम होगी। वहीं इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढऩे से किसानों और चीनी मिलों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा। इसलिए एथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य केवल ईंधन बदलना नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण—तीनों क्षेत्रों में दीर्घकालिक लाभ प्राप्त करना है।

