बढ़ती जनसंख्या, परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, गरीबी और मातृ स्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए आज विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस की शुरुआत वर्ष,1987 को मनाए गए फाइव बिलियन डे की घटना से हुई थी। इस दिन दुनिया की जनसंख्या 5 अरब के आंकड़े तक पहुंच गई थी। इस भारी वृद्धि को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग काउंसिल ने 1989 में इस दिवस की स्थापना की। पहली बार इसे 11 जुलाई, 1990 को मनाया गया था और इसे 90 से अधिक देशों द्वारा मनाया गया। तब से यह हर वर्ष मनाया जा रहा है। इसके मानने का प्रमुख उद्देश्य बढ़ती आबादी का पर्यावरण, विकास और प्राकृतिक संसाधनों पर पडऩे वाले प्रभावों को लेकर लोगों को सतर्क करना है तथा प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के महत्व को बताना ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके। सीमित संसाधनों के बीच सभी के लिए बेहतर शिक्षा, रोजगार और जीवन स्तर सुनिश्चित करने की रणनीति बनाना है। जहां वर्ष, 2023 में भारत, चीन को पीछे छोडक़र सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन गया। वहीं वर्ष, 2026 में हमारी आबादी 9146 करोड़ होगी। 65 फीसदी आबादी 35 साल से कम है। सही स्किल और नौकरी मिले तो ये भारत के लिए सबसे बड़ा ताकत बन सकती है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, शहरों में भीड़, जलवायु परिवर्तन यह सब हमारे समक्ष चुनौतियां हैं, इन्हें बैलेंस करना पड़ेगा। इस दिन सरकार, एनजीओ, स्कूल-कॉलेज में सेमिनार, रैली, पोस्टर कॉम्पिटिशन, परिवार नियोजन, बेटी बचाओ, स्वस्थ परिवार का संदेश और स्वास्थ्य मंत्रालय नए डेटा और रिपोर्ट जारी करते हैं। यूं कह सकते हैं कि विश्व जनसंख्या दिवस डराने के लिए नहीं है। ये हमें याद दिलाता है कि हर एक जीवन मायने रखता है। अगर हम प्लानिंग से चलें तो ज्यादा आबादी बोझ नहीं, ताकत बन सकती है।

