Sunday, July 12, 2026 |
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क्लिनिकल रिसर्च, नवाचार और ज्ञान को मिला नया आयाम

Patanjali Research Foundation, Patanjali University और AIIMS Rishikesh के बीच MoU, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा

by Business Remedies
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हरिद्वार, 09 जुलाई: भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के समन्वित विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए Patanjali Research Foundation (PRF), Patanjali University एवं All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) Rishikesh के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता विशेष रूप से क्लिनिकल स्टडीज़, वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक सहयोग, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान तथा स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है। इस सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग करते हुए रोगियों के हित में साक्ष्य-आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर Acharya Balkrishna ने कहा कि यह साझेदारी न केवल दोनों संस्थानों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी, अपितु भारत में एक ऐसे समन्वित स्वास्थ्य मॉडल को भी सशक्त बनाएगी, जिसमें पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियां एक-दूसरे की पूरक बनकर कार्य करेंगी।

आगे उन्होंने कहा कि Patanjali का विश्वास है कि संयुक्त क्लिनिकल अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से जनस्वास्थ्य के लिए अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय समाधान प्रस्तुत किया जा सकेगा।

इस अवसर पर AIIMS Rishikesh की निदेशक एवं सीईओ Prof. (Dr.) Meenu Singh ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक ज्ञान के बीच वैज्ञानिक संवाद एवं सहयोग वर्तमान समय की आवश्यकता है। यह समझौता क्लिनिकल रिसर्च, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर प्रदान करेगा।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से ऐसे वैज्ञानिक प्रमाण विकसित होंगे, जो रोगियों के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और बेहतर बनाएंगे।

इस अवसर पर Patanjali University के उपकुलपति Prof. Mayank Kumar Agrawal भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से आवश्यकतानुसार वैज्ञानिक एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेंगे तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों के लिए प्रशिक्षण एवं एक्सचेंज प्रोग्राम संचालित करेंगे।

AIIMS Rishikesh के डीन (रिसर्च) Prof. Shailendra Handu ने इस अवसर पर कहा कि इस सहयोग के माध्यम से आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की संयुक्त क्षमताओं का उपयोग करते हुए रोगियों के हित में वैज्ञानिक प्रमाण-आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। यह समझौता समग्र स्वास्थ्य की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

Patanjali Research Foundation के प्रमुख वैज्ञानिक Dr. Anurag Varshney ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता केवल संयुक्त अनुसंधान तक सीमित नहीं है, अपितु यह दोनों संस्थानों की वैज्ञानिक क्षमता के विकास में, क्लिनिकल स्टडीज़ और डेटा-आधारित अनुसंधान में तथा युवा शोधकर्ताओं की विज्ञानपरक बौद्धिक प्रगति के लिए भी एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। दोनों संस्थानों के विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों का पारस्परिक सहयोग ऐसे उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान करने में सक्षम बनाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मानकों पर खरे उतरेंगे और वैश्विक स्तर पर भारत की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

यह सहयोग भारत सरकार के उस व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप भी है, जिसमें नवाचार, अनुसंधान, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय के माध्यम से देश को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन तीनों संस्थानों का यह सहयोग भारत में समग्र स्वास्थ्य अनुसंधान के एक नए अध्याय का सूत्रपात करेगा। इससे न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान को नई गति मिलेगी, अपितु भविष्य में ऐसे साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य समाधान विकसित होंगे, जो देश और विश्व के करोड़ों लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे। यह समझौता आयुर्वेद, आधुनिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करते हुए भारत को वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



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