जयपुर | जावेद खान | क्रिकेट का बादशाह विराट कोहली। मैदान पर वो पहले से ही एक अलग मुकाम बना चुके हैं। लेकिन क्या अब वो बिजनेस की दुनिया में भी अपना साम्राज्य खड़ा कर रहे हैं? आज हम बात करने वाले हैं विराट के अपने शूज ब्रांड One8 की। एक ऐसी कहानी जो सिर्फ प्रोडक्ट लॉन्च करने की नहीं, बल्कि एक बड़े फैसले और उसके पीछे की समझदारी भरी स्ट्रैटेजी की है।
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जब कोई बड़ा ब्रांड किसी स्टार एथलीट को मोटी रकम ऑफर करे तो उसे ठुकराना आसान नहीं होता। खासकर जब वो ऑफर तीन सौ करोड़ रुपये का हो। विराट कोहली के मामले में भी यही हुआ। आठ साल तक उन्होंने Puma के साथ पार्टनरशिप की। शुरू में एक सौ दस करोड़ रुपये की डील हुई थी। लेकिन जब Puma ने नया एक्सटेंशन ऑफर किया तीन सौ करोड़ रुपये का, तो विराट ने उसे ठुकरा दिया। उनके फैसले के पीछे क्या वजह थी? उन्होंने महसूस किया कि सिर्फ दूसरे के ब्रांड का चेहरा बनकर रहने से बेहतर है अपना खुद का ब्रांड खड़ा करना। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी जेब से चालीस करोड़ रुपये एजिलिटास स्पोर्ट्स नाम की कंपनी में निवेश कर दिया। इस कंपनी ने मोचिको नाम की बड़ी शूज मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को अपने साथ जोड़ लिया।
अब डिजाइन से लेकर प्रोडक्शन तक सब कुछ उनके कंट्रोल में आ गया। विराट ने खुद सत्रह बार डिजाइन चेक किया और रिजेक्ट किया। उसके बाद ही उन्हें वो शूज मिला जो उनके स्टैंडर्ड के मुताबिक था।लेकिन असली दिलचस्पी उनकी प्रमोशन स्ट्रैटेजी में है। विराट ने अपने ब्रांड को आगे बढ़ाने के लिए कोई पारंपरिक एडवर्टाइजिंग का रास्ता नहीं चुना। सबसे पहले उन्होंने अपने बचपन के कोच राजकुमार शर्मा को गिफ्ट किया बिल्कुल पहला जोड़ा। कोच के घर गए, उनके पैर छुए और एक ऐसा भावुक पल बनाया जो कैमरे में कैद हो गया। फिर उन्होंने युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी को One8 के शूज गिफ्ट किए। सूर्यवंशी के पास उस समय कोई शूज स्पॉन्सर नहीं था। विराट ने खुद आगे बढ़कर उन्हें सपोर्ट किया। RCB के खिलाड़ियों को, दूसरे खिलाड़ियों को और कई सेलिब्रिटीज को गिफ्ट करके उन्होंने अपने ब्रांड को हर जगह पहुंचा दिया।ये सब कुछ कैमरे में शूट हो रहा था। One8 ब्रांड की ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगीं। ये कोई साधारण प्रमोशन नहीं था।
ये एक इमोशनल स्ट्रैटेजी थी जिसमें लोगों के दिल को सीधा छुआ गया। नतीजा ये हुआ कि लोग खुद-ब-खुद One8 शूज के बारे में सर्च करने लगे। जब आधिकारिक तौर पर One8 के शूज दिल्ली में लॉन्च किए गए तो नतीजे चौंकाने वाले थे। सिर्फ चौबीस घंटे में डेढ़ लाख जोड़े बिक गए। ये कहानी सिर्फ एक शूज ब्रांड की सफलता की नहीं है। ये उस इंसान की समझदारी की है जिसने इमोशन का इस्तेमाल करके अपने ब्रांड को लोगों के दिल में जगह दी। अब सवाल ये उठता है कि विराट कोहली का ये कदम आगे जाकर क्रिकेटर्स के बिजनेस मॉडल को कितना बदल देगा? क्या आने वाले समय में और भी खिलाड़ी एंडोर्समेंट की जगह ओनरशिप को प्राथमिकता देंगे? और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या विराट का ये फैसला लंबे समय में उनके करियर और ब्रांड दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा? आपको क्या लगता है?

