बिजनेस रेमेडीज़/नई दिल्ली। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) दिल्ली-मेरठ रोड पर अपनी महत्वाकांक्षी हरनंदीपुरम आवास योजना के लिए पहले चरण में पांच गांवों की जमीन अधिग्रहित करेगा। पहले आठ गांवों की जमीन लेने की याजना जीडीए ने बनाई थी। अब मथुरापुर, नगला फिरोज मोहनपुर, शमशेर, चंपत नगर और भनेड़ा खुर्द गांवों की ही जमीन खरीदी जाएगी। पहले चरण में भोपापुर, शाहपुर निजमोर्टा और मोर्टा गांवों की जमीन नहीं ली जाएगी।
हरनंदीपुरम को 521 हेक्टेयर क्षेत्र में बसाने की योजना है। लगभग 462 हेक्टेयर जमीन सीधे किसानों से खरीदी जाएगी। जिन तीन गांवों जमीन को फिलहाल बाहर किया गया है उनका कुल रकबा 125.28 हेक्टेयर है। हाल ही जीडीए की एक बैठक हुई, जिसमें योजना के लिए प्रस्तावित जमीन की दरों पर चर्चा की गई और प्राधिकरण ने तीन गांवों को छोडऩे का प्रस्ताव रखा।
जनवरी में की गई थी जमीन की पहचान: हरनंदीपुरम आवासीय परियोजना के लिए जनवरी में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने जमीन के टुकड़ों की पहचान की थी और किसानों से आपत्तियां आमंत्रित की थीं। अब एक समिति का गठन जमीन की दरें तय करने के लिए किया गया है। इसके लिए प्राधिकारण वर्तमान सर्कल दरों और बाजार दरों पर विचार कर रहा है। जमीन की दरें अगले 10-15 दिनों में तय होने की उम्मीद है।
जीडीए के मीडिया समन्वयक रुद्रेश शुक्ला ने कहा कि जीडीए ने फिलहाल तीन गांवों को छोडऩे और हरनंदीपुरम योजना के पहले चरण के विकास के लिए पांच गांवों की जमीन ही लेने का प्रस्ताव दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्राधिकरण ने पाया कि पांच गांवों में जमीन की उपलब्धता और खरीद अधिक आसान है, बाकी जमीन को दूसरे चरण में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि गांवों को छोडऩे का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। वत्स ने कहा कि गांवों को छोडऩे का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ये गांव योजना के दूसरे चरण में शामिल किए जाएंगे। जीडीए ने कहा कि हरनंदीपुरम आवास योजना के पहले चरण में मथुरापुर, नगला फिरोज मोहनपुर, शमशेर, चंपत नगर और भनेड़ा खुर्द से जमीन खरीदी जाएगी।
रघुनाथपुर के रहने वाले दक्ष नगर ने कहा कि जीडीए ने जिन तीन गांवों की जमीन छोडऩे का निर्णय लिया है, उनकी सर्किल दरें अन्य गांवों से अधिक हैं। यह कदम अचानक आया है, जब किसानों ने आपत्तियां दर्ज कराई। प्राधिकरण से आपत्तियों के निपटारे के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। आठ गांवों में सर्कल दरें समान नहीं हैं और बाजार दरों से काफी कम हैं। इसलिए अंतिम दरें वही होनी चाहिए जो हमें स्वीकार्य हों। अन्यथा, हम अपनी जमीन परियोजना के लिए नहीं देंगे।
जिला मजिस्ट्रेट दीपक मीणा ने कहा कि जीडीए ने फिलहाल कुछ गांवों को छोडऩे का प्रस्ताव दिया है। वे शायद चरणबद्ध तरीके से योजना को आगे बढ़ाना चाहते हैं। अब एक समिति जमीन की दरों पर निर्णय लेने के लिए आगे बढ़ेगी। इसके लिए हम वर्तमान सर्कल दरों और बाजार दरों पर विचार कर रहे हैं। दरें अगले 10-15 दिनों में तय होने की उम्मीद है।

