उपभोक्ता ठगी से बच सकें, इसके लिए सरकार नेचुरल और लैब में तैयार किए गए हीरों के बीच फर्क को समझने में उलझनों को दूर करने के लिए कदम उठा रही है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी इस मामले में नए दिशा निर्देश जारी भी किए हैं। सरकार की ओर से उठा जा रहा यह कदम सराहनीय कहा जा सकता है। इन दिशा-निर्देशों के तहत हीरों की सही लेबलिंग के साथ-साथ सभी प्रकार के हीरों की उत्पत्ति और प्रोडक्शन के तरीकों की जानकारी देना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही लैब में तैयार किए गए हीरों के लिए नेचुरल या जेनुइन डायमंड जैसे शब्दों के इस्तेमाल की मनाही भी होगी। पिछले दिनों सीसीपीए ने इस मुद्दे पर चीफ कमिश्नर निधि खरे की अध्यक्षता में डायमंड इंडस्ट्री और विशेषज्ञों के साथ बैठक भी की है। बैठक में हुई चर्चा में यह सामने आया कि नेचुरल डायमंड और लैब-ग्रोन डायमंड के बीच अंतर की सही जानकारी न होने से ग्राहकों के हितों का उल्लंघन हो रहा है। वहीं पारदर्शिता को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए सीसीपीए जल्द ही गाइडलाइंस जारी करेगा। जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के नॉर्दर्न रीजन के चेयरमैन ने भी कहा कि कई बार ग्राहक नेचुरल डायमंड समझकर लैब-ग्रोन डायमंड खरीद लेते हैं और उन्हें बाद में यह महसूस होता है कि इनका मूल्य नेचुरल डायमंड जितना नहीं होता। उन्होंने कहा कि सही लेबलिंग से इंडस्ट्री और उपभोक्ता दोनों के हितों की रक्षा हो सकेगी। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने स्पष्ट भी किया है कि शब्द डायमंड का उपयोग केवल नेचुरल डायमंड के लिए किया जाना चाहिए। वहीं सिंथेटिक डायमंड की नेचुरल डायमंड जैसे ग्रेडिंग की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स के नियमों के अनुसार, लैब-ग्रोन डायमंड के उत्पादन के तरीके को भी स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है। सरकार के इस कदम से शादी-विवाह में जवाहरात खरीदने वाले उपभोक्ताओं को काफी सहूलियत मिल सकेगी।

