दुनियाभर में चल रहे ट्रेडवार तथा पाकिस्तान से तनाव के बीच गतदिनों भारत और यूके के मध्य हुए बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता भारत के लिए विकास प्रेरक रहेगा। इससे आर्थिक विकास तो होगा ही साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा। विश्व की पांचवी और छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच लंबे समय से मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। जो गतदिनों दोनों देशों के बीच साकार हुई है। इन समझौतों से साझेदारी और निवेश बढ़ेगा। यह समझौता फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। इसके साथ ही डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन समझौता भी हुआ है। यह समझौते व्यापार को बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इससे भारत और ब्रिटेन दोनों को फायदा होगा। व्यापार में आसानी होगी, निवेश बढ़ेगा, नौकरियां मिलेंगी और नए विचारों को बढ़ावा मिलेगा। यह समझौता तीन साल से चल रही बातचीत के बाद हुआ है। इसका लक्ष्य है कि वर्ष, 2040 तक दोनों देशों के बीच व्यापार 25.5 अरब पाउंड बढ़ जाए। ब्रिटेन सरकार का भी कहना है कि इस समझौते से 2040 तक ब्रिटेन की जीडीपी में 4.8 अरब पाउंड की बढ़ोतरी होगी। जानकारी यह भी मिली है कि इस समझौते के तहत भारत, यूके के 90 फीसदी आयातों पर टैरिफ में कटौती करेगा, जिनमें से 85 फीसदी आयात एक दशक के भीतर पूरी तरह से टैरिफ मुक्त हो जाएंगे। भारत यूके से आयातित व्हिस्की और जिन पर टैरिफ को आधा करके 75 फीसदी कर देगा, ऑटो पर टैरिफ को घटाकर 10 फीसदी कर देगा। इसके अलावा भारत-यूके एफटीए अनिश्चितताओं से जूझ रहे मौजूदा वैश्विक व्यापार माहौल के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाने का काम करेगा। यह सौदा भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद फायदेमंद होगा, जो यूके के बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहते हैं। यूके भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में 50 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। व्यापार समझौते के साथ आने वाले वर्षों में इसके कई गुना बढऩे की उम्मीद है।

