केन्द्र सरकार ने E-25 Petrol को जल्द लागू किए जाने संबंधी खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल E-20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो वह केवल वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और सभी आवश्यक मानकों की पुष्टि के बाद ही लिया जाएगा।
सरकारी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, E-20 Petrol को लेकर लोगों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यह ईंधन पिछले 2.5 वर्षों से व्यापक परीक्षण, मूल्यांकन और तकनीकी जांच के बाद देशभर में इस्तेमाल किया जा रहा है तथा इसके उपयोग से जुड़ी सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पहले ही पूरी की जा चुकी हैं। सरकार की यह सफाई ऐसे समय में आई है, जब अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के कारण वाहनों की क्षमता और ईंधन दक्षता पर असर पड़ने को लेकर सार्वजनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या से बचा जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश में लगभग 20 करोड़ पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन और करीब 20 लाख पेट्रोल से चलने वाले चारपहिया वाहन इथेनॉल मिश्रित ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि E-20 का उपयोग बड़े स्तर पर पहले से ही किया जा रहा है। इससे पहले जुलाई में सरकार ने इथेनॉल मिश्रण को लेकर 10 महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था। इसमें कहा गया था कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण वैज्ञानिक शोध, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और नियामकीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप है।
सरकार ने उन दावों को भी गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि 1 लीटर इथेनॉल तैयार करने के लिए 10,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। सरकार के अनुसार, इथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त चावल का उपयोग किया जाता है, जिसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता पूरी होने के बाद ही उपलब्ध कराया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि इथेनॉल बनाने वाले संयंत्र सामान्य रूप से 1 लीटर इथेनॉल उत्पादन के लिए लगभग 3 से 5 लीटर संसाधित पानी का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही अधिकांश संयंत्र Zero Liquid Discharge प्रणाली अपना रहे हैं, जिससे पानी का पुनर्चक्रण कर दोबारा उपयोग किया जाता है।
सरकार के अनुसार, इथेनॉल कार्यक्रम के तहत आपूर्ति किए जा रहे इथेनॉल में अब 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी मक्का की है। मक्का की खेती में धान की तुलना में काफी कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि जैसे कदमों के माध्यम से मक्का उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E-20 कोई नया या अपरीक्षित ईंधन नहीं है। इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग दुनिया के कई देशों में कई दशकों से किया जा रहा है और इसके सुरक्षित उपयोग को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध हैं।

