Saturday, July 11, 2026 |
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E20 Blending से कुछ वाहनों की माइलेज में 3-5 प्रतिशत कमी संभव

लेकिन फायदे कहीं अधिक: पेट्रोलियम मंत्रालय

by Business Remedies
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E20 Blending Benefits Explained By Petroleum Ministry In India

नई दिल्ली।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि E20 Blending लागू होने के बाद कुछ वाहनों की माइलेज में लगभग 3-5प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, लेकिन केवल माइलेज के आधार पर इस ईंधन का आकलन करना उचित नहीं है। मंत्रालय के अनुसार E20 अधिक ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन, बेहतर पिकअप, अधिक स्मूद एक्सेलरेशन और इंजन के स्वच्छ संचालन जैसे कई महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।

मंत्रालय ने बताया कि E10 के अनुरूप वाहनों की तैयारी के लिए वर्ष 2020-21 से ही वाहन निर्माताओं के साथ व्यापक स्तर पर चर्चा शुरू कर दी गई थी। भारत ने पेट्रोल में 10प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य जून 2022 में निर्धारित समय से 5महीने पहले ही हासिल कर लिया था। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार E20 के लिए इससे भी अधिक व्यापक और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाई गई। वाहन निर्माता कंपनियों, कलपुर्जा आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण एजेंसियों और शोध संस्थानों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया गया। आईएमसी द्वारा तैयार रोडमैप वर्ष 2021 से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध था, जिसमें चरणबद्ध तरीके से E20 लागू करने की पूरी योजना दी गई थी।

मंत्रालय ने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान सामग्री की अनुकूलता, इंजन की कैलिब्रेशन, ईंधन प्रणाली, वाहन संचालन क्षमता, टिकाऊपन, उत्सर्जन और ईंधन दक्षता सहित हर महत्वपूर्ण पहलू का गहन परीक्षण किया गया। इसके बाद ही E20 को पूरे देश में लागू करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने यह भी बताया कि E20 लागू करने से पहले वाहन निर्माता कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों, परीक्षण एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ कई दौर की विस्तृत बैठकें आयोजित की गईं ताकि पूरे तंत्र की तैयारी सुनिश्चित की जा सके। मंत्रालय का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनियां परीक्षण परिणामों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीं तो वे इस ईंधन का समर्थन नहीं करतीं और न ही वाहनों की वारंटी जारी रखतीं।

मंत्रालय ने कहा कि वर्तमान में लगभग सभी वाहन निर्माता कंपनियां पुराने और नए दोनों प्रकार के वाहनों की वारंटी का पालन कर रही हैं, क्योंकि वे शुरू से ही इस पूरी प्रक्रिया का हिस्सा रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मारुति सुज़ुकी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे वाहन भी शामिल थे जिन्हें E20 प्रमाणन प्राप्त नहीं था। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि किसी भी वाहन में E20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसावट या कलपुर्जों की आयु कम होने जैसी कोई समस्या सामने नहीं आई।

इसी प्रकार हीरो मोटोकॉर्प ने भी अपने वास्तविक उपयोग के अनुभव के आधार पर समान परिणाम दर्ज किए हैं। मंत्रालय का कहना है कि वास्तविक परिस्थितियों में प्राप्त ये आंकड़े किसी एक-दो व्यक्तिगत दावों की तुलना में कहीं अधिक भरोसेमंद हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार E20 से बेहद कम कणीय प्रदूषण होता है और इसके उपयोग से पूरे जीवनचक्र के दौरान कार्बन उत्सर्जन में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आती है। मंत्रालय ने कहा कि कुल मिलाकर E20, E10 और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक प्रभावी ईंधन है।

मंत्रालय ने प्रीमियम पेट्रोल से की जाने वाली तुलना को भी गलत बताया। आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रीमियम ईंधन सीमित मात्रा में बिकने वाला विशेष उत्पाद है, जिसमें प्रदर्शन बढ़ाने वाले विशेष मिश्रण मिलाए जाते हैं। इसे देशभर में उपलब्ध सामान्य ईंधन से अलग नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने कहा कि पूरे देश में एक साथ शुद्ध पेट्रोल, E10 और E20 के लिए अलग-अलग आपूर्ति व्यवस्था संचालित करना अत्यंत जटिल और महंगा कार्य होगा। सरकार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एथेनॉल उत्पादन और उससे जुड़ी आधारभूत संरचना के विकास के लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹.1 लाखकरोड़ के निवेश को वित्तपोषित किया है। देशभर में एथेनॉल संयंत्र, आसवनी इकाइयां, भंडारण सुविधाएं और परिवहन नेटवर्क विकसित किए गए हैं ताकि भारत के एथेनॉल मिश्रण लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जा सके।



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