New Delhi, July 10: भारत अपने विशाल कृषि अपशिष्ट और कम लागत वाले हरित हाइड्रोजन की मदद से टिकाऊ विमानन ईंधन तैयार कर सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि Power-And-Biomass-To-Liquids उद्योग के माध्यम से भारत Sustainable Aviation Fuel तैयार करने की मजबूत क्षमता रखता है।
यह रिपोर्ट India Energy And Climate Centre, UC Berkeley Goldman School Of Public Policy और Energy Innovation Policy And Technology ने मिलकर तैयार की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत तेज विकास के साथ कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इनमें आयातित कच्चे तेल पर बढ़ती निर्भरता, कृषि अवशेष जलाने से बढ़ता वायु प्रदूषण और विमानन क्षेत्र से बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन शामिल हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास कम लागत वाले हरित हाइड्रोजन और बड़े स्तर पर कृषि अवशेष आपूर्ति शृंखला विकसित करने की बड़ी क्षमता है। Power-And-Biomass-To-Liquids प्रक्रिया में धान और गेहूं के भूसे जैसे अतिरिक्त फसल अवशेषों को गैस में बदला जाता है। इसके बाद इसे हरित हाइड्रोजन के साथ मिलाकर Fischer-Tropsch प्रक्रिया के माध्यम से तरल Jet Fuel में बदला जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस रास्ते से Sustainable Aviation Fuel की उत्पादन लागत वैश्विक मानकों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसका मुख्य कारण हरित हाइड्रोजन की कम कीमत और कृषि अवशेषों की कम लागत है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जब तक भारत में तैयार होने वाला यह ईंधन जीवाश्म Jet Fuel से सीधे मुकाबला नहीं कर पाता, तब तक यह बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा कर सकता है। साथ ही यह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से जुड़ा जोखिम भी कम कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, Power-And-Biomass-To-Liquids आधारित Sustainable Aviation Fuel का बाजार आकार बहुत बड़ा है। यह वर्ष 2050 तक भारत की पूरी विमानन ईंधन मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2030 के दशक में या उससे पहले बाजार स्थितियों और नीति समर्थन के आधार पर इसकी लागत जीवाश्म Jet Fuel से कम हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू स्तर पर तैयार यह ईंधन आयातित कच्चे तेल पर निर्भर जीवाश्म विमान ईंधन की तुलना में कम आर्थिक जोखिम वाला विकल्प हो सकता है। इससे कृषि अवशेषों का उपयोग बढ़ेगा, जिन्हें अभी कई जगह जलाया जाता है। इससे वायु प्रदूषण घटाने और विमानन क्षेत्र को कम कार्बन वाला बनाने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीक व्यावसायिक प्रदर्शन और विस्तार के लिए तैयार है। लागत, कार्बन तीव्रता और संसाधन दक्षता के मामले में यह कई अन्य Sustainable Aviation Fuel तकनीकों से बेहतर साबित हो सकती है। इससे स्थानीय वायु प्रदूषण के कारण होने वाली समयपूर्व मौतों को कम करने जैसे लाभ भी मिल सकते हैं।
रिपोर्ट में जिला स्तर पर विस्तृत आकलन किया गया है। इसमें कहा गया है कि दिल्ली, पुणे और मुंबई हवाईअड्डों के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त कृषि अवशेषों की उपलब्धता और कम लागत वाले हरित हाइड्रोजन की स्थिति अनुकूल है। इसलिए ये क्षेत्र इस उद्योग के शुरुआती विकास के लिए उपयुक्त हो सकते हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अगर भारत शुरुआती निवेश को बढ़ावा देता है और समझदार नीतियों के जरिए पहली बार बड़े स्तर पर लागू होने वाली तकनीकी बाधाओं को दूर करता है, तो देश आत्मनिर्भरता, जनस्वास्थ्य और वैश्विक जलवायु नेतृत्व को मजबूत कर सकता है।

