Sunday, July 12, 2026 |
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सरकार ने प्रतिबंधित किए गए BAT-BMS जैसे Apps

कैसे दूर से बंद कर सकते हैं E-Rickshaw

by Business Remedies
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BAT-BMS App Security Risk For E-Rickshaw Lithium-Ion Battery In India

New Delhi,

केंद्र सरकार ने कुछ मोबाइल Apps पर सख्ती शुरू कर दी है, क्योंकि सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में दावा किया गया कि कुछ लोग अपने स्मार्टफोन की मदद से चलते हुए E-Rickshaw को दूर से ही बंद कर रहे हैं। इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी को देखते हुए Ministry Of Electronics And Information Technology (MeitY) ने Google Play Store और Apple App Store को BAT-BMS, Lossigy और Epoch I-Ion जैसे Apps को हटाने का निर्देश दिया है। सरकार इन Apps से जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा जोखिमों की भी जांच कर रही है। जानकारी के अनुसार, BAT-BMS नाम का App चीन की शेनझेन ग्रीनर्जी टेक्नोलॉजी द्वारा विकसित किया गया था। यह Bluetooth से जुड़े Lithium-Ion बैटरी सिस्टम की निगरानी के लिए बनाया गया है। इसकी सहायता से बैटरी का वोल्टेज, करंट, तापमान, चार्जिंग चक्र और बैटरी की स्थिति को वास्तविक समय में देखा जा सकता है।

इसके अलावा यह App बैटरी के कुछ महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करने की सुविधा भी देता है। इसमें बैटरी के डिस्चार्ज फ़ंक्शन को चालू या बंद करने का विकल्प मौजूद होता है, जिसका उपयोग सामान्य रूप से रखरखाव और सुरक्षा के उद्देश्य से किया जाता है। भारत में बड़ी संख्या में E-Rickshaw में Lithium-Ion बैटरियां लगी हुई हैं, जिनमें Bluetooth आधारित Battery Management System (BMS) का उपयोग किया जाता है। कई मामलों में इन सिस्टम में कोई पासवर्ड सुरक्षा नहीं होती या फिर इनमें कंपनी द्वारा दिया गया डिफॉल्ट पासवर्ड ही इस्तेमाल किया जाता रहता है।

ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति लगभग 10से20मीटर की Bluetooth रेंज के भीतर मौजूद हो, तो वह BAT-BMS या इसी तरह के किसी अन्य App की सहायता से बैटरी से जुड़ सकता है। यदि कनेक्शन सफल हो जाए, तो वह बैटरी के डिस्चार्ज फ़ंक्शन को बंद कर सकता है, जिससे E-Rickshaw की बिजली आपूर्ति तुरंत बंद हो जाती है। जब बैटरी ही निष्क्रिय हो जाती है, तब चालक इग्निशन चाबी से भी E-Rickshaw को दोबारा चालू नहीं कर सकता। वाहन को फिर से चालू करने के लिए उसी App के माध्यम से बैटरी से दोबारा जुड़कर डिस्चार्ज फ़ंक्शन को सक्रिय करना पड़ता है।

एक E-Rickshaw चालक ने बताया कि कुछ दिन पहले उनका वाहन अचानक बीच रास्ते में बंद हो गया था। शुरुआत में उन्हें लगा कि वाहन में कोई तकनीकी खराबी आ गई है, इसलिए वह उसे मैकेनिक के पास लेकर गए। मैकेनिक ने जांच के बाद बताया कि वाहन में कोई यांत्रिक खराबी नहीं है, बल्कि किसी ने Software के माध्यम से बैटरी को बंद कर दिया है। इसके बाद उसने मोबाइल App की मदद से बैटरी को दोबारा सक्रिय किया, जिसके लिए उसने ₹.300 लिए। बैटरी चालू होते ही E-Rickshaw फिर से सामान्य रूप से चलने लगा।

चालक ने यह भी दावा किया कि यह समस्या बाद में फिर सामने आई। इस बार जब वह यात्रियों को लेकर सड़क पर चल रहे थे, तभी किसी ने दोबारा बैटरी बंद कर दी। उनका कहना है कि यदि बैटरी इस तरह लॉक हो जाए, तो उसे केवल उसी App के माध्यम से दोबारा खोला जा सकता है। उन्होंने कहा कि चालक तकनीकी विशेषज्ञ नहीं होते, इसलिए ऐसी स्थिति में उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह खतरा केवल उन E-Rickshaw तक सीमित है, जिनमें Bluetooth आधारित Lithium-Ion बैटरी लगी हो और उनके Battery Management System (BMS) में पासवर्ड या उचित सुरक्षा व्यवस्था मौजूद न हो।

देश में अभी भी बड़ी संख्या में E-Rickshaw ऐसे हैं, जिनमें सीसा-अम्ल बैटरियों का उपयोग किया जाता है। इनमें Bluetooth आधारित Battery Management System (BMS) नहीं होता, इसलिए ऐसे वाहन इस प्रकार की समस्या से प्रभावित नहीं होते। इसी तरह जिन आधुनिक Lithium-Ion बैटरियों में मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और विशेष Software सुरक्षा का उपयोग किया जाता है, उन्हें सामान्य Battery Management Apps के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। वहीं अधिकांश ब्रांडेड इलेक्ट्रिक कारों और अन्य आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों में Battery Management System (BMS) तथा वाहन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के बीच कई स्तर की साइबर सुरक्षा और एन्क्रिप्टेड संचार व्यवस्था होती है। इसी कारण उनमें इस प्रकार की अनधिकृत पहुंच बनाना काफी कठिन माना जाता है।



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