आज भारत में घर-घर बोली जाने वाली भाषा हिंदी है। पर वर्तमान में विश्व में इसे नजर अंदाज किया जाता रहा है। इसी उद्देश्य को पूरा करने को लेकर हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में बढ़ावा देने और इसके उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए आज विश्व हिंदी दिवस मनाया जाएगा। इस दिवस का इतिहास 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से जुड़ा है, जिसमें हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप में बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया था। हिंदी दिवस मनाने की आधिकारिक शुरुआत वर्ष, 2006 में की गई थी। पूर्व प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। इस दिन विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावास में भी हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। यह दिन हिंदी साहित्य, संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष की विश्व हिंदी दिवस की थीम ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’ पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य है कि हिंदी पारंपरिक रूप से एक भाषा होने के साथ तकनीक की दुनिया में भी आगे है। इस भाषा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार की ओर से इसे कोडिंग से लेकर डिजिटल प्लेटफॉम्र्स पर आसान इस्तेमाल के लिए बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हिंदी भारत में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। यह सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को उनके भाव प्रकट करने के लिए भी इस भाषा का अधिक महत्व माना जाता है। हिंदी सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं, बल्कि यह संवाद का वह तरीका है, जिससे हर भारतीय लगाव महसूस करता है। भारत में बोली जाने वाली सभी भाषाओं को देखें, तो इसमें हिंदी का ग्राफ सबसे ऊंचा नजर आता है। विभिन्न स्रोतों के मुताबिक यहां 60 करोड़ से अधिक लोग हिंदी भाषा बोलते हैं। विभिन्न सरकारी व निजी स्कूलों में हिंदी को अनिवार्य रूप से पढ़ाया भी जाता है। हिंदी भाषा के सम्मान में हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है। वैसे राष्ट्रीय हिंदी दिवस से अलग है। यह हर साल 14 सितंबर को मनाया जाता है।

