Sunday, March 8, 2026 |
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भारत जल्द ही दुनिया की टॉप 3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा: Dr. Jitendra Singh

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री Dr. Jitendra Singh ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2014 में ‘कमजोर पांच’ अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने से लेकर आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तक का भारत का सफर देश के आत्मविश्वास, क्षमता और दिशा में बड़े बदलाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत अब निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है और वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करेगा।

Thiruvananthapuram के Kowdiar में P. Parameswaran Memorial Lecture देते हुए Dr. Singh ने बताया कि वर्ष 2014 में Global Innovation Index में भारत 81वें स्थान पर था, जो अब बढ़कर 38वें स्थान पर पहुंच गया है। देश में अब दो लाख से अधिक Startup हैं, जो 21 लाख से ज्यादा रोजगार दे रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब वर्ष 2015 में ‘Startup India’ की घोषणा की गई थी, तब यह अवधारणा कई लोगों के लिए नई थी, लेकिन आज यह देशव्यापी आंदोलन बन चुका है। इनमें से लगभग आधे Startup Tier 2 और Tier 3 स्तर के शहरों से उभर रहे हैं, और इनमें बड़ी संख्या महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हैं।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण पर पारंपरिक सोच में बदलाव आ रहा है। आज महिला वैज्ञानिक और नवप्रवर्तक अंतरिक्ष, विज्ञान और शासन से जुड़े देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व कर रही हैं। अनुसंधान के क्षेत्र में Dr. Singh ने कहा कि Patent आवेदन के मामले में भारत दुनिया में छठे स्थान पर है और इनमें से 60 प्रतिशत से अधिक आवेदन भारतीयों द्वारा दायर किए गए हैं। वैज्ञानिक प्रकाशनों के मामले में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में शोध पत्रों को वैश्विक स्तर पर उद्धृत किया जा रहा है। हजारों भारतीय वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं, जो भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा की वैश्विक पहचान को दर्शाता है।

मंत्री ने कहा कि नीतिगत सुधारों से निजी क्षेत्र की भागीदारी के नए रास्ते खुले हैं, जिससे भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में तेज विस्तार हुआ है। रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताएं भी काफी बढ़ी हैं, निर्यात में वृद्धि हुई है और आत्मनिर्भरता मजबूत हुई है। उन्होंने आगे कहा कि समुद्री संसाधनों, गहरे समुद्र के खनिजों और जैव विविधता की खोज भविष्य में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के मूल्य संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत’ को आज के युवा ही आकार देंगे।



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