Friday, September 11, 2026 |
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भारत के अंतरिक्ष अभियान में साझेदारी का आह्वान

पेरिस स्पेस सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी का वैश्विक देशों को निमंत्रण

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नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेरिस में आयोजित पहले अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को वीडियो कॉन्प्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए फ्रांस समेत दुनियाभर के देशों को भारत के आगामी अंतरिक्ष अभियानों में साझेदार बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लाभों को पूरी मानवता तक पहुंचाना है।
इसरो ने कम लागत में प्रभावी काम कर बनाई पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष दृष्टिकोण वसुधैव कुटुंबकम, अर्थात एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य की भावना पर आधारित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, संवाद और बहुपक्षीय सहयोग पर आधारित सुरक्षित, संरक्षित, शांतिपूर्ण और टिकाऊ अंतरिक्ष व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य का अंतरिक्ष क्षेत्र टकराव के बजाय सहयोग, अल्पकालिक लाभ के बजाय स्थिरता और बहिष्कार के बजाय समावेशिता के सिद्धांतों पर आगे बढऩा चाहिए।
संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसरो ने कम लागत में प्रभावी और विश्वसनीय अंतरिक्ष मिशन संचालित करके वैश्विक पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि इसरो की तकनीकें किसानों, मछुआरों, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में एक महत्वपूर्ण स्थान
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक 34 देशों के 430 से अधिक उपग्रह भारतीय प्रक्षेपण यानों के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजे जा चुके हैं। यह भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय उन वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जिन्होंने दशकों की मेहनत से इसरो को वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाई। उन्होंने हाल के अंतरिक्ष मिशनों का उल्लेख करते हुए कहा कि चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रचा, जबकि आदित्य-एल1 मिशन सूर्य के अध्ययन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने में लगा हुआ है। इन उपलब्धियों ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।
भारत का 2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने दोहराया कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ये महत्वाकांक्षी लक्ष्य केवल भारत के नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारी और वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से मानवता की सामूहिक प्रगति के लक्ष्य हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसरो के साथ-साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेज गति से आगे बढ़ रहा है। देश में बड़ी संख्या में स्पेस स्टार्टअप्स और निजी कंपनियां उभर रही हैं, जो भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं। इसरो की उत्कृष्टता के साथ उद्यमिता की ऊर्जा जुड़ रही है और भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।
इसरो का 220 केएन थ्रस्ट पर सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल हॉट टेस्ट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गुरुवार को कहा कि उसने अपने सीई20 क्रायोजेनिक इंजन का 220 केएन के अपरेटेड थ्रस्ट (बढ़ी हुई क्षमता) पर फ्लाइट एक्सेप्टेंस हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह आने वाले एलवीएम3 मिशन की दिशा में एक और कदम है। यह टेस्ट तमिलनाडु के महेंद्रगिरि में इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में किया गया। सीई20 इंजन आने वाले एलवीएम3 मिशन के सी32 अपर स्टेज (ऊपरी हिस्से) के लिए तय किया गया है। यह टेस्ट क्रायोजेनिक इंजन की बढ़ी हुई थ्रस्ट क्षमता को दिखाता है और इसका मकसद उड़ान से पहले इसके परफॉर्मेंस को वेरिफाई करना है।



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