नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारत में मौजूद कोयले और लिग्नाइट से अब यूरिया, सिंथेटिक प्राकृतिक गैस और सिनगैस जैसे जरूरी उत्पाद बनाने की तैयारी जोरों से चल रही है। केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपए की कोल गैसीफिकेशन योजना के पहले दौर में सात आवेदन मिले हैं। इसमें अडानी एंटरप्राइजेज, एनटीपीसी, तालचेर फर्टिलाइजर्स, गैलेंट इस्पात और श्याम सेल एंड पावर जैसी कंपनियां शामिल हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मई, 2026 में इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को उच्च मूल्य वाले उत्पादों जैसे सिंगैस, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और हाइड्रोजन में परिवर्तित करने को बढ़ावा देना है।
पहल से आयात पर निर्भरता होगी कम
सरकार का मानना है कि इस पहल से देश की एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। वित्त वर्ष, 2024-25 में इन उत्पादों का कुल आयात मूल्य लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपए रहा था। यह योजना भारत के 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने के लक्ष्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें से 75 मिलियन टन क्षमता इसी योजना के माध्यम से विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
रोजगार के अवसर होंगे पैदा
सरकार के अनुसार, इससे देश में 3 लाख करोड़ रुपए तक के निवेश को आकर्षित करने और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। वर्तमान योजना जनवरी, 2024 में मंजूर की गई 8,500 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन योजना का विस्तार है। उस योजना के तहत फिलहाल 8 कोयला गैसीकरण परियोजनाएं विभिन्न चरणों में लागू की जा रही हैं।
योजना का दूसरा चरण खुला
कोयला मंत्रालय ने यह भी घोषणा की कि योजना का दूसरा चरण मंगलवार से खोल दिया गया है। प्रस्ताव अनुरोध (आरएफपी) के अनुसार, आवेदन जमा करने की नई अवधि हर दो महीने के अंतराल पर खोली जाएगी, जिससे पात्र कंपनियों को परियोजनाओं के लिए आवेदन करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार के अनुसार निविदा जारी होने के बाद 7 जुलाई को पहले दौर के आवेदन जमा किए गए थे।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मिलेगी मदद
कोल गैसीफिकेशन में कोयले को सीधे जलाने के बजाय नियंत्रित प्रक्रिया के जरिए गैस में बदला जाता है। इससे तैयार सिनगैस का इस्तेमाल यूरिया, मेथनॉल, अमोनिया, हाइड्रोजन और सिंथेटिक प्राकृतिक गैस जैसे उत्पाद बनाने में किया जा सकता है। भारत में कोयले का बड़ा भंडार मौजूद है। सरकार इस घरेलू संसाधन का इस्तेमाल ऐसे उत्पादों के निर्माण में करना चाहती है, जिन्हें अभी बड़े स्तर पर विदेश से मंगाना पड़ता है। इससे आयात पर खर्च कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

