Friday, September 11, 2026 |
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“डेंटिस्ट्री अब अधिक सटीक और कम इनवेसिव हो गई है”: डॉ. कपिल सिंघल ने बताया टेक्नोलॉजी, प्रिवेंटिव केयर और ओरल हेल्थ का भविष्य

Dr. Kapil Singhal ने बताया Preventive Care, Digital Technology और Cosmetic Dentistry का बढ़ता महत्व

by Business Remedies
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Dr. Kapil Singhal discussing digital dentistry preventive care and modern oral healthcare

चारु भाटिया| जयपुर 

पिछले एक दशक में डेंटिस्ट्री के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। ओरल हाइजीन को लेकर बढ़ती जागरूकता, डिजिटल टेक्नोलॉजी में प्रगति और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की बढ़ती मांग ने मरीजों के डेंटल केयर को देखने के तरीके को बदल दिया है। CAD/CAM डेंटिस्ट्री और इंट्राओरल स्कैनर से लेकर डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग तक, आधुनिक डेंटिस्ट्री अब अधिक सटीक, व्यक्तिगत और कम इनवेसिव होती जा रही है। जयपुर के मानसरोवर स्थित एकदंतम डेंटल क्लिनिक के संस्थापक डॉ. कपिल सिंघल इस बदलाव को करीब से देख रहे हैं | वे गम्स और डेंटल इंप्लांट के विशेषज्ञ हैं और एक दशक से अधिक समय से मरीजों का उपचार कर रहे हैं। इसके अलावा वे देशभर में सर्जिकल वर्कशॉप आयोजित कर लगभग 1,000 डेंटिस्ट को प्रशिक्षण दे चुके हैं।

उनकी पत्नी डॉ. आकांक्षा गर्ग कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडॉन्टिक्स में पोस्टग्रेजुएट हैं तथा न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से प्रमाणित कॉस्मेटिक डेंटिस्ट हैं। वे एडवांस्ड रिस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री, रूट कैनाल ट्रीटमेंट और स्माइल मेकओवर में विशेषज्ञता रखती हैं।

एक विशेष बातचीत में डॉ. कपिल सिंघल ने अपने सफर, डेंटिस्ट्री में आए बदलाव, प्रिवेंटिव ओरल हेल्थकेयर, कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री, आम डेंटल मिथकों और आधुनिक उपचार में टेक्नोलॉजी की भूमिका पर विस्तार से बात की।

सवाल: आप एक दशक से अधिक समय से डेंटिस्ट्री के क्षेत्र में हैं। अपने सफर और इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा के बारे में बताइए।

जवाब: डेंटिस्ट्री में मेरा सफर 2004 में शुरू हुआ, जब मैंने डेंटल साइंस में ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू की। इसके बाद 2014 में मैंने जयपुर के SMS कॉलेज से डेंटल साइंसेज में पोस्टग्रेजुएशन पूरा किया। उस समय SMS कॉलेज में डेंटिस्ट्री की केवल एक सीट थी और मैंने राज्य में प्रथम रैंक हासिल की थी। इसके अलावा AIIMS में प्रवेश के लिए मेरी रैंक तीसरी और PGI चंडीगढ़ के लिए चौथी थी। 2015 में मैंने एकदंतम डेंटल क्लिनिक की शुरुआत की। मरीजों की सेवा करते हुए अब करीब 11 वर्ष हो चुके हैं। शुरुआत में क्लिनिक सीमित जगह में था, लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ। राजस्थान में हम शुरुआती डेंटल क्लिनिक्स में शामिल रहे, जिन्होंने डेंटल ट्रीटमेंट में डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाया।

आज हम CAD/CAM डेंटिस्ट्री, CT स्कैन और इंट्राओरल स्कैनर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे डेंटल समस्याओं की पहचान और उपचार की बेहतर प्लानिंग की जा सकती है। CAD/CAM टेक्नोलॉजी की मदद से क्राउन, ब्रिज और वेनियर्स जैसी डेंटल रिस्टोरेशन को अधिक सटीक तरीके से डिजाइन और तैयार किया जा सकता है। मेरे परिवार ने भी मुझे इस क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया। मेरे पिता और भाई दोनों डॉक्टर हैं। उन्हें मरीजों की सेवा करते हुए देखकर ही मेरे मन में हेल्थकेयर के क्षेत्र में आने की प्रेरणा पैदा हुई। मैं पीरियोडॉन्टिस्ट हूं और गम्स तथा डेंटल इंप्लांट के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखता हूं। मेरी पत्नी डॉ. आकांक्षा गर्ग कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडॉन्टिक्स में पोस्टग्रेजुएट हैं तथा NYU, न्यूयॉर्क से प्रमाणित कॉस्मेटिक डेंटिस्ट हैं। वे एडवांस्ड रिस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री, रूट कैनाल ट्रीटमेंट और स्माइल मेकओवर में विशेषज्ञ हैं। क्लिनिकल प्रैक्टिस के साथ-साथ मैं डेंटल एजुकेशन से भी जुड़ा हूं। देशभर में डेंटिस्ट के लिए सर्जिकल वर्कशॉप आयोजित करता हूं और अब तक लगभग 1,000 डेंटिस्ट को प्रशिक्षण दे चुका हूं।

सवाल: पिछले एक दशक में डेंटिस्ट्री किस तरह बदली है?

जवाब: सबसे बड़ा बदलाव मरीजों में जागरूकता बढ़ने के रूप में आया है। पहले डेंटिस्ट्री को मुख्य रूप से दांत निकालने से जोड़कर देखा जाता था। आज मरीज समझते हैं कि डेंटल हेल्थ में प्रिवेंशन, रिस्टोरेशन, एस्थेटिक्स और लंबे समय तक दांतों की देखभाल भी शामिल है। कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री भी तेजी से लोकप्रिय हुई है। लोग अपनी मुस्कान और दांतों की खूबसूरती को लेकर अधिक जागरूक हुए हैं और डेंटल हेल्थ तथा अपीयरेंस पर खर्च करने के लिए तैयार हैं। टेक्नोलॉजी भी इस बदलाव का बड़ा कारण है। डिजिटलाइजेशन ने डेंटिस्ट्री को काफी बदल दिया है। आधुनिक डायग्नोस्टिक टूल्स, डिजिटल स्कैन, CAD/CAM सिस्टम और 3D टेक्नोलॉजी ने उपचार को अधिक सटीक और बेहतर तरीके से प्लान करने योग्य बनाया है। आज डेंटिस्ट के लिए एडवांस्ड ट्रेनिंग और नई तकनीकों को सीखने के भी अधिक अवसर उपलब्ध हैं।

सवाल: कौन से शुरुआती लक्षण बताते हैं कि व्यक्ति को डेंटिस्ट के पास जाना चाहिए?

जवाब: लोगों को तेज दर्द होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। दांत में हल्का दर्द, दांतों के बीच खाना फंसना, छोटी कैविटी, दांतों में सेंसेटिविटी, मसूड़ों से खून आना या मुंह से दुर्गंध आना किसी डेंटल समस्या का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करने से छोटी समस्या आगे चलकर गंभीर हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कैविटी का समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह दांत के अंदर तक पहुंच सकती है और रूट कैनाल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर स्थिति में दांत निकालना भी पड़ सकता है। समय पर जांच कराने से प्राकृतिक दांत को बचाने में मदद मिलती है और उपचार भी कम जटिल और कम खर्चीला हो सकता है।

सवाल: चाय, कॉफी, मीठे और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स के अधिक सेवन का दांतों पर क्या असर पड़ता है?

जवाब: कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और चाय-कॉफी जैसे पेय पदार्थों का बार-बार सेवन मुंह में एसिडिक वातावरण बना सकता है। एसिड के लगातार संपर्क में रहने से दांतों का इनेमल प्रभावित हो सकता है और इरोशन का खतरा बढ़ सकता है। मीठे पेय पदार्थ बैक्टीरिया की गतिविधि और कैविटी बनने की संभावना को भी बढ़ा सकते हैं। अगर इन समस्याओं को नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर रूट कैनाल या दांत निकालने जैसी प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करना और ओरल हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है।

सवाल: बच्चों में कौन सी डेंटल आदतें विकसित करनी चाहिए?

जवाब: बच्चों में कम उम्र से ही स्वस्थ खान-पान और ओरल हाइजीन की आदतें विकसित करनी चाहिए। जंक फूड और अधिक मीठे खाद्य पदार्थों तथा ड्रिंक्स का सेवन सीमित होना चाहिए। माता-पिता को बच्चों को पौष्टिक भोजन खाने, मुंह अच्छी तरह कुल्ला करने और दिन में दो बार ब्रश करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। फास्ट फूड और मीठे पेय रोज की आदत नहीं बनने चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि माता पिता खुद बच्चों के सामने उदाहरण पेश करें। बच्चे अक्सर अपने माता-पिता को देखकर आदतें सीखते हैं। यदि माता-पिता स्वयं अच्छी ओरल हाइजीन अपनाएंगे तो बच्चों के लिए भी इसे अपनाना आसान होगा।

सवाल: सोशल मीडिया ने ‘परफेक्ट स्माइलको ब्यूटी स्टैंडर्ड बना दिया है। क्या इससे कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री की मांग बढ़ी है?

जवाब: हां, कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री में रुचि बढ़ी है क्योंकि लोग अपने दांतों और मुस्कान की खूबसूरती को लेकर पहले से अधिक जागरूक हैं। कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री मुख्य रूप से दांतों की सुंदरता और उनके एस्थेटिक अपीयरेंस को बेहतर बनाने पर केंद्रित होती है और यह डेंटिस्ट्री का ही एक हिस्सा है। मरीज की जरूरत के अनुसार इसमें ब्रेसेज, अलाइनर्स, वेनियर्स और स्माइल डिजाइनिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। राजस्थान के कई इलाकों में फ्लोरोसिस के कारण दांतों पर दाग या डिसकलरेशन की समस्या भी देखने को मिलती है। पहले दांतों की आकृति और रंग बदलने के लिए कई बार क्राउन का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें दांतों को काफी घिसना पड़ सकता था। अब उपयुक्त मामलों में वेनियर्स की मदद से दांतों के आकार और रंग में बदलाव किया जा सकता है और यह अपेक्षाकृत अधिक कंजर्वेटिव तरीका हो सकता है। डिजिटल स्माइल डिजाइनिंग भी एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति है। डिजिटल स्कैन, विशेष सॉफ्टवेयर और 3D प्रिंटिंग की मदद से सटीक मॉडल और सर्जिकल गाइड तैयार किए जा सकते हैं। इन तकनीकों ने कई डेंटल प्रक्रियाओं को अधिक सटीक, बेहतर तरीके से प्लान करने योग्य और कम समय लेने वाला बनाया है।

सवाल: एकदंतम डेंटल क्लिनिक में मरीजों को कौनकौन सी प्रमुख सेवाएं मिलती हैं?

जवाब: एकदंतम में लगभग सभी प्रमुख डेंटल प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं। मैं पीरियोडॉन्टिस्ट हूं और गम ट्रीटमेंट तथा डेंटल इंप्लांट मेरे विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। डॉ. आकांक्षा गर्ग एंडोडॉन्टिस्ट हैं और रूट कैनाल ट्रीटमेंट, रिस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री तथा स्माइल डिजाइनिंग में विशेषज्ञता रखती हैं। हम सर्जिकल प्रक्रियाएं भी करते हैं और हमारे साथ डेंटल विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम काम करती है। हमारा उद्देश्य केवल डेंटल समस्या का उपचार करना नहीं है, बल्कि सही डायग्नोसिस के आधार पर मरीज की जरूरत के अनुसार उचित ट्रीटमेंट प्लान तैयार करना भी है।

सवाल: डेंटल हेल्थ से जुड़े कौन से आम मिथक आप दूर करना चाहेंगे?

जवाब: एक आम मिथक है कि प्रोफेशनल तरीके से दांतों की सफाई कराने से दांत कमजोर हो जाते हैं। वास्तव में, क्लीनिंग का उद्देश्य दांतों पर जमा पदार्थों को हटाना और दांतों तथा मसूड़ों को आगे होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करना है। एक और गलत धारणा है कि दांत निकलवाने से आंखें कमजोर हो जाती हैं। दांत निकालने और आंखों की सेहत के बीच इस तरह का सीधा संबंध होने का कोई आधार नहीं है। लोगों को ऐसे मिथकों पर भरोसा करने के बजाय अपनी डेंटल समस्याओं के बारे में योग्य डेंटल प्रोफेशनल से सलाह लेनी चाहिए।

सवाल: अंत में, डेंटल साइंस की पढ़ाई करने वाले युवाओं और नए डेंटिस्ट के लिए आपका क्या संदेश है?

जवाब: मेरा संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—लगातार सीखते रहें और खुद को लगातार बेहतर बनाते रहें। डेंटिस्ट्री ऐसा क्षेत्र है जहां सीखने के लिए हमेशा कुछ नया होता है। चाहे वह कोई नई उपचार तकनीक हो, नई टेक्नोलॉजी हो या मरीजों की देखभाल का नया तरीका। इसके साथ ही अपनी नैतिकता से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। एक डेंटिस्ट की पहली प्राथमिकता मरीज की भलाई होनी चाहिए और उसे लगातार अपने ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए। इस क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन सफलता के लिए धैर्य, निरंतर शिक्षा और नैतिक तरीके से काम करने की प्रतिबद्धता जरूरी है। अगर आप सीखते रहने के साथ अपने पेशेवर मूल्यों को बनाए रखते हैं, तो डेंटिस्ट्री के क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं हैं।



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