Friday, September 4, 2026 |
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‘फिजियोथेरेपी का दायरा बहुत व्यापक है’: डॉ. आयुश लक्षकार ने बताया रिहैबिलिटेशन, टेक्नोलॉजी और मरीजों की देखभाल का बदलता स्वरूप

by Business Remedies
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जयपुर | चारु भाटिया 
पिछले कुछ वर्षों में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में तेजी से बदलाव आया है। कभी जहां फिजियोथेरेपी मुख्य रूप से सामान्य एक्सरसाइज और सीमित उपकरणों तक ही सीमित मानी जाती थी, वहीं आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और आधुनिक रिहैबिलिटेशन तकनीकों ने इस क्षेत्र को काफी उन्नत बना दिया है। बदलती जीवनशैली, लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत, शारीरिक गतिविधियों में कमी और मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं में बढ़ोतरी ने भी फिजियोथेरेपी की जरूरत को बढ़ाया है।
आयुमोशन फिजियोथेरेपी क्लिनिक के संस्थापक और न्यूरो फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. आयुश लक्षकार न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, मूवमेंट डिसऑर्डर, पैरालिसिस, बैलेंस से जुड़ी समस्याओं और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी जैसी स्थितियों से जूझ रहे मरीजों के रिहैबिलिटेशन पर काम करते हैं। बातचीत में उन्होंने फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में अपने सफर, AI और टेक्नोलॉजी की भूमिका, बचाव के तौर पर एक्सरसाइज, स्पोर्ट्स इंजरी, प्रेग्नेंसी के दौरान फिजियोथेरेपी और छोटे शहरों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर विस्तार से बात की।
सवाल: आप आयुमोशन फिजियोथेरेपी क्लिनिक के संस्थापक हैं। आपका अब तक का सफर कैसा रहा और इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा कहां से मिली?
जवाब: फिजियोथेरेपी में मेरा आना कुछ हद तक अप्रत्याशित था। मैंने NEET की परीक्षा दी थी और मेरा चयन भी हो गया था, लेकिन मुझे काफी दूर स्थित कॉलेज मिल रहा था। आखिरकार, मैंने फिजियोथेरेपी को करियर के रूप में चुनने का फैसला किया।
शुरुआत में मेरी इस क्षेत्र में बहुत ज्यादा रुचि नहीं थी और मुझे लगता था कि फिजियोथेरेपी का दायरा सीमित है। लेकिन जैसे-जैसे मैंने इसकी पढ़ाई की और मरीजों के साथ काम करना शुरू किया, मेरी सोच बदलने लगी।
मैंने जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से फिजियोथेरेपी का कोर्स पूरा किया। धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि फिजियोथेरेपी का दायरा बहुत व्यापक है और यह लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकती है। आज मेरे लिए इस पेशे का सबसे संतोषजनक पहलू मरीजों की तकलीफ सुनना और उन्हें बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करना है।
सवाल: पिछले कुछ वर्षों में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में किस तरह का बदलाव आया है?
जवाब: फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। पहले यहां सीमित उपकरणों का इस्तेमाल होता था और रिहैबिलिटेशन मुख्य रूप से पारंपरिक तकनीकों और एक्सरसाइज पर निर्भर था। लेकिन लगातार हो रही रिसर्च और टेक्नोलॉजी के विकास के साथ इसका तरीका काफी आधुनिक हो गया है।
आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आधुनिक रिहैबिलिटेशन उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से मरीजों की मूवमेंट को ज्यादा सटीक तरीके से समझने और उनके लिए बेहतर रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार करने में मदद मिलती है। फिजियोथेरेपी अब अधिक संगठित, रिसर्च आधारित और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन क्षेत्र बन रही है।
सवाल: आज की पीढ़ी को ‘सिटिंग जनरेशन’ कहा जाता है। लंबे समय तक बैठने से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है?
जवाब: लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में कई तरह की पोस्टर संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आज हम ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती देख रहे हैं, जिन्हें राउंडेड शोल्डर्स, कमर दर्द, सर्वाइकल समस्या और लगातार मांसपेशियों में दर्द जैसी परेशानियां होती हैं।
इसका प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। लगातार निष्क्रिय रहने का असर मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्ति की ऊर्जा पर भी पड़ सकता है। ऐसे लोग धीरे-धीरे शारीरिक गतिविधियों से दूर हो सकते हैं। इसलिए दिनभर में छोटे-छोटे अंतराल पर शरीर को सक्रिय रखना और नियमित रूप से मूवमेंट करना बहुत जरूरी है।
सवाल: AI और टेक्नोलॉजी फिजियोथेरेपी और रिहैबिलिटेशन में किस तरह मदद कर सकती है?
जवाब: पैरालिसिस और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी जैसी स्थितियों में टेक्नोलॉजी काफी मददगार साबित हो सकती है। आधुनिक रिहैबिलिटेशन उपकरण बायोफीडबैक उपलब्ध करा सकते हैं। इससे मरीज और फिजियोथेरेपिस्ट यह समझ सकते हैं कि मूवमेंट के दौरान मांसपेशियां किस तरह प्रतिक्रिया कर रही हैं।
कुछ उपकरण ऐसी मांसपेशियों की गतिविधियों को भी देखने और मापने में मदद करते हैं, जिन्हें सामान्य रूप से केवल आंखों से देखना संभव नहीं होता। इससे मरीज की स्थिति का आकलन करने और रिहैबिलिटेशन की प्रगति को ट्रैक करने में अतिरिक्त जानकारी मिलती है। AI और टेक्नोलॉजी को फिजियोथेरेपिस्ट का विकल्प नहीं, बल्कि एक ऐसा माध्यम माना जाना चाहिए जो उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने में सहायता करता है।
सवाल: आयुमोशन में आप किन सेवाओं पर विशेषज्ञता रखते हैं और न्यूरो फिजियोथेरेपी, ऑर्थो फिजियोथेरेपी से किस तरह अलग है?
जवाब: मैं न्यूरो फिजियोथेरेपी में विशेषज्ञता रखता हूं। इसमें हम पैरालिसिस, मूवमेंट डिसऑर्डर, बैलेंस की समस्या, पार्किंसंस, स्पाइनल कॉर्ड इंजरी और दूसरी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों वाले मरीजों के साथ काम करते हैं।
वहीं ऑर्थोपेडिक फिजियोथेरेपी मुख्य रूप से हड्डियों, जोड़ों और मस्कुलोस्केलेटल समस्याओं से जुड़ी होती है। न्यूरो रिहैबिलिटेशन कई मामलों में लंबे समय तक चल सकता है। कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में मरीज को लंबे समय तक या जीवनभर फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ सकती है, ताकि उसकी मूवमेंट, कार्यक्षमता और स्वतंत्रता को बनाए रखा जा सके।
सवाल: अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए आप कौन सी सामान्य एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं?
जवाब: लोगों को अपनी दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधि को शामिल करना चाहिए। स्ट्रेचिंग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन किए जा सकते हैं। व्यक्ति की फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जिम, रनिंग या तेज गति से पैदल चलना भी किया जा सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात नियमितता है। हर व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और जरूरत के अनुसार गतिविधि चुननी चाहिए। बिना सही तकनीक या मार्गदर्शन के अत्यधिक एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए।
सवाल: क्या अब गैर-पेशेवर खिलाड़ियों में भी स्पोर्ट्स इंजरी बढ़ रही हैं?
जवाब: हां, स्पोर्ट्स इंजरी अब काफी आम हो रही हैं। इसका एक कारण यह भी है कि कई लोग पर्याप्त ट्रेनिंग, कंडीशनिंग या वार्म-अप के बिना ही खेलना शुरू कर देते हैं।
ACL इंजरी आम स्पोर्ट्स इंजरी में शामिल है और गिरना इसका एक कारण हो सकता है। क्रिकेट और फुटबॉल में अलग-अलग तरह की चोटों का खतरा रहता है। वहीं टेनिस जैसे खेलों में लगातार एक जैसी गतिविधि करने से ओवरयूज इंजरी हो सकती है, जिसमें कलाई से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।
यह समस्या केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। लगातार घर के काम करने और शारीरिक मेहनत करने से भी ओवरयूज और एक्सर्शन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
सवाल: क्या प्रेग्नेंसी के दौरान फिजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है?
जवाब: प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल, दोनों चरणों में फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। गर्भावस्था के अलग-अलग ट्राइमेस्टर के अनुसार एक्सरसाइज की योजना बनाई जा सकती है, ताकि मां और बच्चे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखा जा सके।
उचित एक्सरसाइज मांसपेशियों को मजबूत करने और प्रसव के लिए शरीर को तैयार करने में मदद कर सकती हैं। फिजियोथेरेपी मांसपेशियों के कॉन्ट्रैक्शन और रिलैक्सेशन में भी सहायता कर सकती है। डिलीवरी के बाद पोस्ट-नेटल फिजियोथेरेपी ताकत बढ़ाने, कुछ जटिलताओं को कम करने और शरीर का सही पोश्चर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
सवाल: टियर-3 शहरों और छोटे कस्बों तक फिजियोथेरेपी के महत्व की जानकारी कैसे पहुंचाई जा सकती है?
जवाब: फिजियोथेरेपी कैंप इसके लिए सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक हो सकते हैं। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि रिहैबिलिटेशन और रिकवरी में फिजियोथेरेपी किस तरह मदद कर सकती है।
डॉक्टरों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जहां चिकित्सकीय रूप से उचित हो, वहां डॉक्टर यदि मरीजों को फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं तो मरीज इसके महत्व को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। कुछ स्थितियों में फिजियोथेरेपी रिकवरी और कार्यक्षमता सुधारने में मदद कर सकती है और उचित मामलों में सर्जरी या अन्य इनवेसिव उपचार की जरूरत को कम करने में भी भूमिका निभा सकती है। हालांकि, उपचार का निर्णय हमेशा मरीज की व्यक्तिगत मेडिकल स्थिति के आकलन के आधार पर होना चाहिए।
सवाल: क्या नियमित फिजियोथेरेपी को कॉरपोरेट वेलनेस प्रोग्राम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए?
जवाब: बिल्कुल। कॉरपोरेट कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी समस्या अक्सर समय की होती है। लंबे समय तक काम करने के कारण वे अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य के लिए अलग से समय नहीं निकाल पाते।
कंपनियां कर्मचारियों को ब्रेक के दौरान साधारण स्ट्रेचिंग और मोबिलिटी एक्सरसाइज करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। ऑनलाइन फिजियोथेरेपी कंसल्टेशन भी एक विकल्प है, जिसके जरिए कर्मचारी कम समय में सही एक्सरसाइज सीख सकते हैं। व्यस्त शेड्यूल वाले लोग भी अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे एक्सरसाइज सेशन शामिल कर सकते हैं।
सवाल: अंत में, आप फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में आने वाले युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब: मैं युवा और नए फिजियोथेरेपिस्ट्स से कहना चाहूंगा कि इस क्षेत्र का दायरा बहुत व्यापक है। पहले फिजियोथेरेपी का क्षेत्र उतना संगठित और विकसित नहीं था, लेकिन आज यह अधिक व्यवस्थित और आधुनिक हो चुका है। एडमिशन प्रक्रिया में भी बदलाव आया है और संबंधित पाठ्यक्रमों में NEET के माध्यम से प्रवेश की व्यवस्था है। सीटों की संख्या भी बढ़ी है।
युवा उम्मीदवारों के लिए मेहनत और समर्पण सबसे महत्वपूर्ण हैं। फिजियोथेरेपी में धैर्य की आवश्यकता होती है, क्योंकि रिहैबिलिटेशन में कई बार समय लगता है। लेकिन जब आप किसी व्यक्ति को ठीक होते, अपने रोजमर्रा के काम खुद करते या दर्द से राहत पाते देखते हैं, तो जो संतुष्टि मिलती है, वह बहुत बड़ी होती है।



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