बिजऩेस रेमेडीज/जयपुर। समय में विपरीत भौगोलिक परिस्थितियां हैं, जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण एवं दूषित पर्यावरण मानव समाज के लिये अत्यन्त चिंताजनक है। यह कहना है हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर की कुलपति प्रो. सुधि राजीव का।
प्रो. सुधि राजीव सोमवार को S.S. Jain Subodh स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं राजस्थान भूगोल परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रही थीं। इस दौरान प्रो. राजीव ने राजस्थान भूगोल परिषद् के अथक प्रयासों एवं समाजोपयोगी कार्यों की प्रशंसा की। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. के.के.पाठक, सचिव, कार्मिक एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार ने कहा कि षिक्षक वहीं है जो जीवनपर्यन्त छात्र बना रहे। इस यात्रा में अनुसंधान ही छात्र के सतत् विकास का पर्याय बनता है।
दूसरे विषिष्ट अतिथि डॉ.समित शर्मा, सचिव, पषुपालन एवं गोपालन विभाग, राजस्थान सरकार ने कहा कि स्वतंत्रता के पष्चात् भारत में तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई। वर्तमान में भूगोल के क्षेत्र में रिमोट सेंसिंग तकनीक, ड्रोन टेक्नोलॉजी से सूक्ष्म अतिसूक्ष्म डेटा भी एकत्रित किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पर्यावरणीय परिवर्तनों के पूर्वाभास में आसानी होगी।
उद्घाटन सत्र के मुख्यवक्ता प्रो. एस. सी. रॉय, प्रोफेसर, दिल्ली विष्वविद्यालय ने संगोष्ठी के विषय पर विस्तारपूर्वक प्रकाष डाला एवं इन क्षेत्रों में निरन्तर शोधकार्य करने की आवष्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के आंरभ में महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रेणु जोषी ने अतिथियों का स्वागत करते हुये महाविद्यालय की समस्त गतिविधियों की जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर प्रो.सावन कुमार जांगिड़ ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. बी.पी. शर्मा ने कहा कि एआई के दौर में हम सभी एक नवीन परिवर्तनकारी युग में प्रवेष कर रहे हैं। महाविद्यालय भी इस दिषा में सतत प्रयासरत है। उल्लेखनीय है कि तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से 700 से अधिक शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने पंजीयन करवाया है। संगोष्ठी के पहले दिन कुल 3 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के बाद पोस्टर एवं प्रदर्शनी लगाई गई। तीन दिवसीय संगोष्ठी के 15 सत्रों में 250 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे। संगोष्ठी में प्रो. हरिषंकर शर्मा, प्रो. पी. आर. व्यास, प्रो. एस. एस. भट्ट समेत कई भूगोलवेता उपस्थित रहे।

