नई दिल्ली,
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत बनाए रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही बैंक ने अपनी नीति का रुख भी तटस्थ रखा, जिससे स्पष्ट होता है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोई बड़ा बदलाव फिलहाल नहीं किया गया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीति निर्णय की घोषणा करते हुए बताया कि स्थायी जमा सुविधा दर 5 प्रतिशत पर और सीमांत स्थायी सुविधा दर 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखी गई है। उन्होंने वर्ष 2025 को चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन यह भी कहा कि अक्टूबर के बाद से महंगाई में कुछ नरमी देखने को मिली है। गवर्नर ने कहा कि फरवरी तक के त्वरित संकेतक आर्थिक गतिविधियों में लगातार मजबूती का संकेत दे रहे हैं। अर्थव्यवस्था की वृद्धि मुख्य रूप से मजबूत निजी खपत और स्थिर निवेश मांग से संचालित हो रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि शहरी खपत में आगे और सुधार होने की संभावना है, जिसमें कर ढांचे में सुधार और सेवा क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, मौद्रिक नीति समिति ने वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर चिंता भी जताई है। गवर्नर के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष और उससे ऊर्जा व बुनियादी ढांचे को होने वाला संभावित नुकसान महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें व्यापक आर्थिक दबाव को बढ़ा सकती हैं। इससे आयातित महंगाई में वृद्धि हो सकती है और चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर धीमी आर्थिक वृद्धि से बाहरी मांग प्रभावित हो सकती है और विदेश से आने वाली धनराशि में भी कमी आ सकती है। संशोधित सकल घरेलू उत्पाद श्रृंखला के अनुसार, पिछले वर्ष की वास्तविक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत आंकी गई है। गवर्नर ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी प्रकार का व्यवधान चालू वर्ष की आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, सरकार द्वारा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को नियंत्रित करने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारिक वातावरण में विश्वास बना हुआ है और उद्योग जगत का दृष्टिकोण सकारात्मक है। stock market update: मौद्रिक नीति के इस निर्णय का असर शेयर बाजार पर संतुलित देखा गया, जहां निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।



