Home Business and EconomyFY27 में भारत की GDP Growth रहने का अनुमान 6.7प्रतिशत, RBI इस वित्त वर्ष ब्याज दरों में नहीं करेगा बदलाव : मॉर्गन स्टैनली

FY27 में भारत की GDP Growth रहने का अनुमान 6.7प्रतिशत, RBI इस वित्त वर्ष ब्याज दरों में नहीं करेगा बदलाव : मॉर्गन स्टैनली

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India GDP Growth Forecast By Morgan Stanley For FY27 With RBI Policy Update

नई दिल्ली : मॉर्गन स्टैनली के अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को कहा कि भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की वास्तविक GDP Growth का अनुमान FY27 में 6.7 प्रतिशत और FY28 में 7प्रतिशत रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI की नीतियां आर्थिक वृद्धि को सहारा देने वाली बनी रहेंगी ताकि विकास पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा संकट का सबसे अधिक असर जून2026 में समाप्त होने वाली तिमाही में देखने को मिल सकता है। इस दौरान महंगी वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में जारी बाधाओं के कारण आर्थिक वृद्धि घटकर 6.5 प्रतिशत Year-On-Year तक पहुंच सकती है। मॉर्गन स्टैनली की मुख्य भारत अर्थशास्त्री उपासना चाचरा ने कहा कि इसके बाद जैसे-जैसे आपूर्ति पक्ष की समस्याएं कम होंगी और वस्तुओं की कीमतों में नरमी आएगी, वैसे-वैसे आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सामान्य स्थिति लौटेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि मार्च 2027 तक वृद्धि दर फिर से स्थिर रुझान के करीब पहुंच जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर लगातार बढ़ सकता है। इससे परिवारों और कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, जिसके कारण उपभोग और निवेश में कटौती देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बाहरी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू मांग पर आधारित रहेगी। हालांकि लंबे समय तक आपूर्ति में रुकावट और महंगी वस्तुओं की कीमतें व्यापक आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन नीतिगत समर्थन जारी रहने की संभावना है।

अप्रैल के आर्थिक संकेतकों में मजबूत घरेलू मांग के चलते मजबूती देखने को मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, जारी संघर्ष और महंगे तेल का असर वृद्धि पर पड़ सकता है, लेकिन वास्तविक परिणाम पहले के अनुमानों से बेहतर रहने की संभावना है। शहरी मांग, आधारभूत ढांचा और रक्षा क्षेत्र में सरकारी पूंजीगत खर्च तथा सेवा निर्यात अर्थव्यवस्था को सहारा देंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर वस्तुओं की महंगाई का असर सीमित रह सकता है, लेकिन आयातित महंगाई और मुद्रा में कमजोरी के कारण थोक मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है।

अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मौसम और कच्चे माल की उपलब्धता के कारण खाद्य महंगाई के जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो चालू खाता घाटा GDP के 1.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। वहीं, पूंजी निवेश प्रवाह में सुस्ती के कारण भुगतान संतुलन लगातार तीसरे वर्ष घाटे में रह सकता है, जिससे मुद्रा पर दबाव बढ़ने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार, RBI FY27 में ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं कर सकता है। केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा। बाहरी दबाव और मुद्रा की स्थिति को संभालने के लिए RBI गैर-ब्याज उपायों का सहारा ले सकता है, जिनमें विदेशी निवेश नियमों को सख्त करना तथा NRI जमा और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के कदम शामिल हो सकते हैं।



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