नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला समय काफी मजबूत रहने की संभावना है। वैश्विक निवेश बैंक Morgan Stanley की नई रिपोर्ट के अनुसार कंपनियों की कमाई में तेज़ बढ़ोतरी, भारतीय रिज़र्व बैंक की राहतकारी नीतियां और ब्याज दरों में कटौती जैसे कदम बाजार को मजबूती देंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकिंग क्षेत्र में नियमों में ढील और बाजार में नकदी बढ़ाने की नीतियां भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत करेंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, उर्वरक और डाटा सेंटर क्षेत्रों में बड़े स्तर पर पूंजीगत खर्च बढ़ रहा है। इसके साथ ही सरकार की ओर से दिए गए बड़े कर कटौती कदम भी कंपनियों की कमाई में तेजी लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पिछले छह तिमाहियों से जारी सुस्ती के बाद अब बाजार में फिर से मजबूती लौटने की संभावना जताई गई है।
Stock Market के अनुसार रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि BSE Sensex जून 2027 तक 89,000 अंकों तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा स्तर से करीब15प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते, चीन के साथ बेहतर होते संबंध और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय बाजार को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है।
रिपोर्ट में इक्विटी रणनीतिकार Ridham Desai ने घरेलू मांग आधारित क्षेत्रों को अधिक मजबूत बताया है। उन्होंने वित्तीय सेवाएं, उपभोक्ता विवेकाधीन और औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की सलाह दी है। वहीं ऊर्जा, कच्चा माल, यूटिलिटी और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में कम निवेश की राय दी गई है। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकती हैं क्योंकि दुनियाभर की कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एप्लिकेशन तैयार करने के लिए भारतीय कंपनियों की ओर रुख कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कम ब्याज दरों, कम कर बोझ और बेहतर आय वृद्धि के चलते उपभोक्ता खर्च बढ़ेगा, जिससे औद्योगिक और उपभोक्ता क्षेत्रों को बड़ा फायदा होगा।
वित्तीय क्षेत्र में भी लगभग200बेसिस प्वाइंट की बढ़त का अनुमान जताया गया है। इसकी वजह मजबूत कर्ज वृद्धि, स्थिर कर्ज लागत और बेहतर ब्याज मार्जिन को माना गया है। हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि भारत अभी भी तेल आयात पर काफी निर्भर है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र में प्रत्यक्ष बड़ी उपस्थिति की कमी बाजार के लिए चुनौती बन सकती है। इसके बावजूद रिपोर्ट का मानना है कि बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में भारत सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हो सकता है। आने वाले वर्षों में देश की जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना है। भारत ऊर्जा अवसंरचना के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिससे डाटा सेंटर उद्योग में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है। साथ ही श्रम उत्पादकता के निम्न शुरुआती स्तर के कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादकता वृद्धि का भारत को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।

